कोरोना के खिलाफ डटकर खड़ी है उत्तराखंड सरकार

कोरोना के खिलाफ डटकर खड़ी है उत्तराखंड सरकार

देहरादून। इस मुसीबत के समय में कोरोना वायरस के खिलाफ उत्तराखंड सरकार डटकर खड़ी है। आपको बता दें कि देश और दुनिया के साथ ही उत्तराखंड पर भी पिछले कुछ महीने काफी भारी गुजरे हैं और मौजूदा वक्त भी काफी कठिनाई पूर्वक व्यतीत हो रहा है। ऐसे में वैश्विक आपदा के रूप में उभरकर सामने आए कोरोना वायरस की वजह से लोगों के सामने गहरा संकट खड़ा हो गया।

आमजन को इस भयंकर महामारी के संक्रमण से बचाने के लिए जहां केंद्र सरकार ने पूरे देश में लॉक डाउन लागू कर दिया, तो वही उत्तराखंड सरकार भी ‘चीनी वायरस’ की वजह से उपजी समस्याओं को दूर करने, हर मुश्किल हालात से जूझने एवं प्रत्येक चुनौती का डटकर मुकाबला करने के लिए एक मजबूत दीवार की तरह कमर कसकर खड़ी है।

थाली बजाकर परिजनों संग कर्मवीरों का आभार प्रकट करते हुए सीएम त्रिवेंद्र

थाली बजाकर परिजनों संग कर्मवीरों का आभार प्रकट करते हुए सीएम त्रिवेंद्र

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने आपदा की इस घड़ी में लोगों को राहत पहुंचाने का हर संभव प्रयास किया है। लॉक डाउन के दौरान आमजन को किसी प्रकार की मुश्किल का सामना ना करना पड़े इसके लिए राज्य सरकार ने कई तरह की व्यवस्थाऐं की। इस दौरान त्रिवेंद्र सरकार की ओर से कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की गई जिनसे मुश्किल दौर में जरूरतमंदों को राहत मिल सके।

फिर चाहे वह सस्ता अनाज देने की योजना हो, या फिर मकानों का किराया माफी एवं स्कूलों की फीस में छूट आदि। यही नहीं देश के बाहरी राज्यों में फंसे हुए अप्रवासी उत्तराखण्डियों को सुरक्षित प्रदेश में वापस लाने के लिए वाहनों की व्यवस्था भी की गई। बाहर से आए लोगों को तकलीफ ना देते हुए व उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक स्वास्थ्य जांच एवं सकुशल क्वॉरेंटाइन किए जाने के इंतजाम हो। सभी जिम्मेदारियों को त्रिवेंद्र सरकार ने बखूबी निभाया है।

उत्तर भारत वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में प्रतिभाग करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत

उत्तर भारत वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में प्रतिभाग करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत

प्रदेश में जारी लॉक डाउन के दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के द्वारा लोगों की जरूरतों एवं उनकी मांग को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर केंद्र सरकार से संपर्क स्थापित किया गया और राज्य के हालातों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को अवगत कराया गया। जिसके फल स्वरुप लॉक डाउन में लोगों को राहत प्रदान की गई। वही मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र के द्वारा राज्य के मंत्रिमंडल एवं संबंधित अधिकारियों के साथ समय-समय पर बैठक कर कोविड-19 की मौजूदा स्थिति की मंत्रणा की गई।

वहीं आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारियों को तत्काल निर्देशित किया गया। जिसके परिणाम स्वरूप उत्तराखंड में काफी हद तक कोरोना वायरस को फैलने से रोका जा सका और देश के आम राज्यों की तुलना में उत्तराखंड में कोरोनावायरस के संक्रमण की रफ्तार बेहद कम रही। वाकई यह मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के ही सार्थक प्रयासों से ही संभव हो पाया है।

संकट की इस घड़ी में जहां प्रत्येक राज्य के मुखियाओं के हाथ पाँव फूले हुए नजर आए। वहीं मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत एकाग्र चित्त होकर धैर्य के साथ अपने कार्य को अंजाम देते हुए दिखाई दिए। उन्होंने सही समय पर सटीक एवं महत्वपूर्ण निर्णय लेकर यह साबित कर दिया कि उनसे कुशल मुख्यमंत्री प्रदेश में कोई दूसरा फिलहाल नहीं हो सकता।

वहीं अपने कुशल कार्यों के बल पर उन्होंने आलोचकों के मुंह पर भी ताला जड़ दिया। इस दौरान उन्होंने उत्तराखंड में टेलीमेडिसिन सेवा व दून मेडिकल कॉलेज में ई हॉस्पिटल सेवा का भी शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र समय-समय पर अपनी टीम के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोविड-19 की मौजूदा स्थिति की समीक्षा भी करते रहे। मुख्यमंत्री का ‘घर चलो अभियान’ काफी हद तक कामयाब नजर आया और लोग राज्य सरकार की तारीफें करते दिखाई दिए।

राज्य सरकार ने जरूरतमंद एवं गरीब लोगों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड राज्य योजना में खाद्यान्न 7.5 किलोग्राम से बढ़ाकर 20 किलोग्राम कर दिया। वही लॉक डाउन के दौरान सीएम ने मुख्यमंत्री राहत कोष की वेबसाइट का भी लोकार्पण किया। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री राहत कोष में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने वाले लोगों का शुक्रिया भी अदा किया।

Trivendra-SIngh-Rawat

कहना न होगा कि संकट के समय में प्रत्येक चुनौती का डटकर सामना करते हुए त्रिवेंद्र सरकार हर मोर्चे पर कामयाब नजर आई। किंतु कुछ विरोधियों को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की कार्यकुशलता फूटी आंख न सुहाई और वे मुख्यमंत्री के रास्तों में रोड़ा अटकाने का काम करते हुए निरंतर सरकार की खिंचाई करते रहे व उनके कामों में खामियां ढूंढते रहे। जबकि दूसरी ओर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत खामोशी से सिर्फ अपने काम पर ध्यान देते रहे और अपनी टीम के साथ दिन रात एक करके लोगों की सेवा में जुटे रहे।

ऐसी तमाम बातें हैं जो उनकी खूबियों को दर्शाती हैं। कोरोना काल में अपने कुशल नेतृत्व के जरिए उन्होंने साबित कर दिया कि चाहे कोई भी बड़ी से बड़ी मुश्किल आ जाए ‘ना डरेंगे ना डिगेंगे’, ‘डटकर हर चुनौती का सामना करेंगे।’ यही हौसला और जज्बा कमोबेश उनके साथ काम करने वाले लोगों के भीतर भी देखने को मिलता है, जो प्रत्येक उत्तराखंडवासी को हिम्मत प्रदान करता है और इस समय में ऐसी हिम्मत की बेहद आवश्यकता भी है।

वाकई मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी की जितनी भी प्रशंसा की जाए कम ही है। उनकी कार्यकुशलता, राज्य वासियों के प्रति सच्ची सेवा, कर्तव्यनिष्ठा एवं उनके ईमानदार चरित्र की जितनी भी प्रशंसा की जाए कम ही है। ऐसी शख्सियत को कोटि-कोटि प्रणाम।

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