करिश्मा तन्ना बनी ‘खतरों के खिलाड़ी 10’ की विजेता, मिला ये ईनाम

करिश्मा तन्ना बनी ‘खतरों के खिलाड़ी 10’ की विजेता, मिला ये ईनाम

मुंबई। स्टंट पर आधारित रियलिटी शो ‘खतरों के खिलाड़ी सीजन 10’ का ग्रैंड फिनाले रविवार को संपन्न हुआ। ग्रैंड फिनाले ने करिश्मा तन्ना ने धर्मेश येलाण्डे को हराकर ट्रॉफी अपने नाम कर ली। इसके साथ ही उन्हें 20 लाख की राशि और मारुती कार ईनाम के तौर पर मिली। शो जीतने के बाद, करिश्मा ने दैनिक भास्कर से बातचीत की जहां उन्होंने अपनी शो की जर्नी और होस्ट रोहित शेट्टी से जुडी कुछ बातें हमसे शेयर की।

मैं कभी इस शो को लेकर कॉन्फिडेंट नहीं थी:

मुझे पिछले कई सालों से ‘खतरों के खिलाड़ी’ के लिए एप्रोच किया जाता था लेकिन मैं कभी इस शो को लेकर कॉन्फिडेंट नहीं थी। मुझे हमेशा लगता था कि ये शो मेरे लिए नहीं हैं। मेकर्स को लगता था कि मैं बहुत स्ट्रॉन्ग हूं और हर किस्म के स्टंट्स कर सकती हूं लेकिन मुझे कभी ऐसा नहीं लगा (हंसते हुए) जब किसी चीज के लिए मैं कॉन्फिडेंट नहीं होती हूं तो उसके साथ कभी आगे नहीं बढ़ती। अपने करियर की बात करूं तो मैं अपनी डांसिंग स्किल्स के बारे में बहुत कॉन्फिडेंट थी और इसीलिए मैंने ‘झलक दिखला जा’ के लिए हामी भरी। जब ‘बिग बॉस’ का ऑफर आया तब मुझे पता था कि मैं अच्छा बोल सकती हूं, मैं अपने लिए खड़ी हो सकती हूं लेकिन ये कॉन्फिडेंस मुझे ‘खतरों के खिलाड़ी’ के लिए कभी नहीं था। बस यही वजह थी कि जब भी मेकर्स मुझे एप्रोच करते थे तो मैं बिना ज्यादा सोचे उन्हें मना कर देती।

अपनी मां के लिए मैंने इस शो के लिए हामी भरी:

इस बार अपनी मां के लिए मैंने इस शो के लिए हामी भरी। मेरी मां चाहती थी कि मैं ये शो करूं और मैं उन्हें कभी मना नहीं कर सकती। जब उन्होंने मुझे कहा कि वे मुझे इस शो में देखना चाहती हैं तब मैंने हामी भर दी। शुरूआत में सिर्फ मां के लिए इस शो का हिस्सा बनना चाहती थी लेकिन फिर जैसे जैसे खेल आगे बड़ा, मेरा कॉन्फिडेंस लेवल बढ़ता गया और फिर हर स्टंट में अपना बेस्ट देने की कोशिश की। बहुत पॉजिटिव सोच के साथ आगे बड़ी। उम्मीद नहीं थी कि शो की विजेता बनूंगी, हालांकि अब जब पीछे मुड़कर इस जर्नी को देखती हूं तब अपनी जर्नी पर ही हैरानी होती हैं। मां बहुत खुश हुई मेरी इस जीत से।

एक स्टंट के दौरान सांप, कॉकरोच और केचुए मेरे ऊपर डाल दिए गए थे:

शो का हर स्टंट नामुमकिन जैसा लग रहा था हालंकि मेरे हिसाब से फिनाले एपिसोड का एक स्टंट बहुत ही खतरनाक था। एक स्टंट मुझे धर्मेश के साथ करना था जहां बहुत सारे सांप, तकरीबन 5000 कॉकरोच और तकरीबन 6000 केचुए (earthworms) मेरे ऊपर डाल दिए गए थे। अपने ऊपर इतने सारे सांप और कीड़े देखकर मुझे अच्छा नहीं लग रहा था, बहुत ही असुविधाजनक महसूस कर रही थी। अब कौन चाहेगा कि इतने सारे कॉकरोच और सांप आपके ऊपर आएं? लेकिन स्टंट कैसे भी पूरा करना था तो कैसे भी इनसे बाहर आई। अब भी जब उस बारे में सोचती हूं तो घिन सी लगती है।

मुझे कभी कॉकरोच या छिपकली से डर नहीं लगा हैं। ऐसा कभी नहीं हुआ कि अचानक से उन्हें घर में देखा तो मैं भाग गई या फिर चिल्ला उठी। बहुत सारे लोग थे जो छिपकली देखकर भाग जाते थे लेकिन मैं ऐसा कभी नहीं करती। हां, बस ये है कि मुझे उन्हें देखना अच्छा नहीं लगता हैं। खुशकिस्मती से मुझे किसी भी चीज का फोबिया नहीं हैं शायद इसी वजह से मैं इस शो को जीत पाई हूं। बस ये स्टंट कर पाउंगी या नहीं, इसी बात का स्ट्रेस हुआ करता था।

मैंने कभी रोहित को इम्प्रेस करने की कोशिश नहीं की:

रोहित शेट्टी मेंटर से बढ़कर आपके लिए एक दोस्त का रोल निभाते थे। हर एक पड़ाव में वे हर कंटेस्टेंट्स को स्टंट पूरा करने में मदद करते थे। हम सबका उनके साथ बहुत ही अच्छा जुड़ाव था। सच कहूं तो मैंने कभी उन्हें इम्प्रेस करने की कोशिश नहीं की। मैं बस अपना काम करती और हां, यदि वे मेरे काम से इम्प्रेस हुए तो जाहिर हैं खुशी की बात तो होगी ही। मैं ऐसी आर्टिस्ट नहीं हूं जो बेमतलब किसी को इम्प्रेस करने की कोशिश करे। मेरा काम लोगों को इम्प्रेस करता हैं। सेट पर कभी रोहित ने मुझे अपने किसी प्रोजेक्ट में लेने की बात तो नहीं की हालांकि अगर उनके दिमाग में ऐसा हैं तो वो मुझे जरूर काम देंगे। इतना भरोसा तो हैं मुझे उनपर (मुस्कुराते हुए)।

मुश्किलों के बाद भी हमने शो पूरा किया ये बहुत बड़ी बात हैं:

लॉकडाउन की वजह से जैसा हम चाहते थे वैसे ऑडियंस तक शो नहीं पहुंचा पाए लेकिन इस बात की खुशी हैं कि ऐसे हालत के बावजूद शो की टीआरपी अच्छी आई। मेरे हिसाब से जो होता हैं वो अच्छे के लिए ही होता हैं। जैसा ग्रैंड फिनाले हम चाहते थे वैसा शूट नहीं कर पाए, इस बात का हम सबको अफसोस हैं। लेकिन हां, एक अच्छी जर्नी थी जिससे बहुत कुछ सीखने को मिला। इतनी मुश्किलों के बाद भी हमने शो पूरा किया ये बहुत बड़ी बात है।

तेजस्वी और धर्मेश काफी स्ट्रॉन्ग प्रतिद्वंद्वी थे:

तेजस्वी और धर्मेश काफी स्ट्रांग प्रतिद्वंद्वी थे क्योंकि दोनों बहुत ही निडर थे। दोनों जो भी स्टंट करते थे बड़े ही कॉन्फिडेंस से करते। यदि मैं नहीं जीतती तो इन दोनों में से कोई एक विजेता होता।

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