मुस्कुराइए कि आप लॉकडाउन में हैं…

मुस्कुराइए कि आप लॉकडाउन में हैं…

इन दिनों पृथ्वी पर अद्भुत घटनाएं घटित हो रही हैं, दरअसल ये सब लॉकडाउन की वजह से ही हो रहा है। प्रदूषण का स्तर घट चुका है। 80 के दौर में जब हम छोटे थे तो पहाड़ दूर से भी हरे रंग के नज़र आते थे। तब वाहन कम थे और प्रदूषण का स्तर भी ना के बराबर ही था। 90 के दशक में ये पहाड़ हमें हरे की जगह दूर से नीले रंग के नज़र आने लगे। अब यदि हाल की ही बात की जाए तो पहाड़ों की जगह सिर्फ धुंध ही नज़र आती है। वजह है तेज़ी से बढ़ा हुआ प्रदूषण का स्तर। प्रदूषण की वजह से अब नीले रंग का प्रकीर्णन भी नज़र नहीं आता। यदि देहरादून का ही उदाहरण दें तो यहाँ से मसूरी के पहाड़ सिर्फ बारिश पड़ने के बाद महज़ 24 घण्टों तक ही दिखते हैं। उसके बाद फिर प्रदूषण की वजह से ये धुंध में खो जाते हैं। वजह है, कुछ समय के लिये बारिश के कारण धूल का स्तर खत्म सा हो जाता है।

अब बात करते हैं लॉकडाउन की। दरअसल लॉकडाउन होने की वजह से वाहन कम चल रहे हैं, लोग घरों में हैं। वातावरण साफ हो गया है। लोग कामकाज की चिंता छोड़ अपने परिवार के संग घरों में दूरदर्शन पर रामायण और महाभारत देख रहे हैं। पशु-पक्षी सब खुलेआम शहरी क्षेत्रों में घूम रहे हैं। आसमान नीला और साफ दिख रहा है, रात्रि में आसमान में तारों की संख्या भी पहले की अपेक्षा अधिक नज़र आ रही है। खुले आसमान में अधिक संख्या में साफ नजर आने वाले तारों को बचपन में हम 70 और 80 के दौर की पीढ़ी के लोग अपने घरों की छतों पर लेटकर आसानी से देखा और गिना करते थे। आज मानों हम फिर से 70 और 80 के दौर में आ गए हों। वाकई हमारी आज की पीढ़ी के लिए ये एक स्वप्न सरीखा ही है जो भविष्य में फिर कभी हमें देखने को नहीं मिलेगा।

शायद ही किसी ने सोचा होगा कि उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में जहाँ गर्मी अधिक पड़ती है वहाँ भी अप्रैल माह में ठंड महसूस होगी और लोगों को गर्म कपड़े पहनने होंगे। शीत लहरी ठंडी हवाएं इन दिनों चारों ओर से आ-जा रही हैं, वरना इन दिनों में लू के थपेड़े शुरू हो जाया करते थे। देहरादून में लोगों ने अभी तक पंखों के स्विच को हाथ नहीं लगाया है। वाकई ऐसा बहुत सालों बाद देखने को मिल रहा है। इससे पूर्व 60 और 65 के जमाने में ही ये क्षेत्र नो फैन ज़ोन हुआ करता था। इन दिनों दूनवासी अब कुछ ऐसा ही महसूस कर रहे हैं। यही नहीं कुछ जगहों पर तो कुछ नए तरह के अद्भुत जीव और पक्षी देखे जाने की खबरें भी सामने आ रही हैं।

जालन्धर शहर से साफ नजर आ रही हिमालय की बर्फ़ीली चोटियां फोटो: रितेश सैनी

जालन्धर शहर से साफ नजर आ रही हिमालय की चोटियां  फोटो: रितेश सैनी

वहीं पंजाब के जालंधर शहर में प्रदूषण का स्तर काफी घट जाने की वजह से वहां के लोगों को अपने घरों की छतों से हिमालय पर्वत की बर्फ़ीली चोटियों के चमत्कारिक दर्शन हो रहे हैं। आपको बता दें कि जालन्धर के नज़दीक ही होशियारपुर जिला स्थित है जो हिमाचल और पंजाब की सीमा में आता है। यहाँ से हिमाचल प्रदेश शुरू हो जाता है। इसके आगे जाकर चिंतपूर्णी और ज्वाला जी के धाम भी हैं। ये क्षेत्र जालन्धर से ज्यादा दूर नहीं है। जालन्धर से ऐसा नजारा 60 या 65 के दशक में ही देखने को मिलता होगा। मगर शायद ही किसी ने सोचा होगा कि ऐसा आज के दिनों में भी संभव हो सकता है। जालन्धर से आयी हिमालय की चोटियों की ये तस्वीर वाक़ई हैरान करती है।

इनदिनों जहाँ पूरा विश्व कोरोना वायरस की महामारी से जूझ रहा है, तो वही लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश मे लॉकडाउन की घोषणा करके देशवासियों को राहत देने का काम किया है। अब ये हमारा भी फ़र्ज़ बनता है कि हम अपनी एवँ दूसरों की सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए अपने घरों में रहें। साथ ही अपने परिवार के लोगों की भी इस भयंकर बीमारी से रक्षा कर सकें। आइये इस वक्त का पूरा आनंद लें और घरों में सुरक्षित रहकर लॉकडाउन का पालन करें।

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