इंडियन आइडल सीजन 3 के विनर Prashant Tamang का निधन, 43 की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा
Prashant Tamang Death: इंडियन आइडल सीजन 3 के विनर प्रशांत तमांग का 43 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। गायक और कोलकाता पुलिस अधिकारी प्रशांत 2007 में प्रसिद्धि हासिल करने में सफल रहे और अपनी यात्रा से लाखों लोगों को प्रेरित किया।

नई दिल्ली। सिंगर और एक्टर प्रशांत तमांग अब इस दुनिया में नहीं रहे, उन्होंने 43 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया। 2007 में ‘इंडियन आइडल सीजन 3’ जीतकर नेशनल लेवल पर पहचान हासिल करने वाले प्रशांत तमांग का आज, 11 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में निधन हो गया। खबरों के अनुसार, तमांग अपने आवास पर मृत पाए गए। फिलहाल उनकी मौत की वजह सामने नहीं आई है, लेकिन प्रारंभिक रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि सिंगर को हार्ट अटैक आने के संकेत हैं, जिसके चलते उनकी जान चली गई, हालांकि आधिकारिक मेडिकल कन्फर्मेशन का इंतजार है।
कोलकाता पुलिस में भी किया काम
प्रशांत तमांग कभी कोलकाता पुलिस में कांस्टेबल के रूप में काम कर रहे थे, इसी दौरान वह पुलिस ऑर्केस्ट्रा में शामिल रहे और पुलिस कार्यक्रमों में प्रस्तुति भी देते थे। उनकी कला दखने के बाद उनके कई सीनियर्स ने उन्हें इंडियन आइडल में जाने की सलाह दी, जिसके बाद प्रशांत ने भी अपनी किस्मत आजमाने पर विचार किया। इंडियन आइडल में ऑडिशन देने के बाद वह न सिर्फ सिलेक्ट हुए, बल्कि सीजन 3 के विनर भी बने।
इस वेब सीरीज में किया काम
हाल ही में प्रशांत ‘पाताल लोक’ के दूसरे सीजन को लेकर सुर्खियों में रहे, जिसमें उन्होंने डेनियल लेचो के रूप में अपने दमदार अभिनय के लिए तारीफें हासिल कीं। इंडियन आइडल जीतने के बाद उन्होंने अपना एक म्यूजिक एल्बम भी निकाला था, जिसमें हिंदी और नेपाली गाने थे। उन्होंने हिंदी के साथ-साथ नेपाली फिल्मों में भी बतौर सिंगर और एक्टर काम किया।
प्रशांत तमांग की जर्नी
प्रशांत तमांग की प्रसिद्धि की कहानी भारतीय रियलिटी टेलीविजन की सबसे प्रेरणादायक कहानियों में से एक है। उस समय कोलकाता पुलिस में कांस्टेबल रहे तमांग ने 2007 में ‘इंडियन आइडल सीजन 3’ के लिए ऑडिशन दिया था। उन्हें इंडस्ट्री से बहुत कम समर्थन मिला था, लेकिन उनकी बेमिसाल ईमानदारी ने पूरे देश का दिल जीत लिया। इसके बाद उन्हें जनता का जबरदस्त समर्थन मिला, खासकर दार्जिलिंग, गोरखा समुदाय और भारत के नॉर्थ ईस्ट से। इससे उनकी सफलता सिर्फ एक टेलीविजन जीत नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक क्षण बन गई।




