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पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र का निधन, मिर्जापुर में ली अंतिम सांस

हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के दिग्गज पंडित छन्नूलाल मिश्र का निधन हो गया। वह 89 के थे। आजमगढ़ में जन्मे पंडित छन्नूलाल को 2020 में पद्मविभूषण से नवाजा गया था। प्रधानमंत्री मोदी ने भी छन्नूलाल मिश्र को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।

मिर्जापुर। पद्मविभूषण से सम्मानित और महान अर्ध-शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र का गुरुवार, 2 अक्टूबर को तड़के निधन हो गया। उन्होंने सुबह करीब 4:30 बजे मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश) स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। वे 89 वर्ष के थे। वह पिछले कुछ समय से बीमार थे। उनका बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सांइस में इलाज चल रहा था। कई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उनकी छोटी बेटी डॉ. नम्रता मिश्रा ने बताया कि मिश्र की तबीयत बुधवार देर रात बिगड़ गई थी। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने सुबह करीब 4:30 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पंडित छन्नूलाल मिश्र का अंतिम संस्कार कब-कहां होगा

पंडित छन्नूलाल मिश्र का अंतिम संस्कार काशी में होगा और उनके पार्थिव शरीर को वाराणसी लाने की तैयारी चल रही है। उनके इकलौते पुत्र, तबला वादक पंडित रामकुमार मिश्र छन्नूलाल का अंतिम संस्कार करेंगे। उनका अंतिम संस्कार आज वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर किया जाएगा। पंडित छन्नूलाल मिश्र का जन्म 3 अगस्त 1936 को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के हरिहरपुर में हुआ था। उन्होंने शुरुआत में अपने पिता बदरी प्रसाद मिश्र से संगीत में ज्ञान लिया था। इसके बाद छन्नूलाल मिश्र ने उस्ताद अब्दुल गनी खान से भारतीय शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ली। बता दें कि वह पंडित अनोखेलाल मिश्र के दामाद भी थे जो प्रसिद्ध तबला वादक थे।

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पीएम मोदी ने छन्नूलाल मिश्र को दी श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को प्रख्यात शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र के निधन पर शोक व्यक्त किया और कहा कि उन्होंने भारतीय संगीत परंपराओं को वैश्विक मंच पर स्थापित करने में अमूल्य योगदान दिया। एक्स पर पोस्ट किए गए एक शोक संदेश में उन्होंने लिखा, ‘सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। वे जीवनपर्यंत भारतीय कला और संस्कृति की समृद्धि के लिए समर्पित रहे। उन्होंने शास्त्रीय संगीत को जन-जन तक पहुंचाने के साथ ही भारतीय परंपरा को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करने में भी अपना अमूल्य योगदान दिया। यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे सदैव उनका स्नेह और आशीर्वाद प्राप्त होता रहा। साल 2014 में वे वाराणसी सीट से मेरे प्रस्तावक भी रहे थे। शोक की इस घड़ी में मैं उनके परिजनों और प्रशंसकों के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट करता हूं। ओम शांति!’

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