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समाजसेवी डॉ. अभिनव कपूर ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर किया नमन

विभाजन के दौरान प्राण गंवाने वाले लोगों को याद करने के लिए आज के दिन पूरे देश में ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान त्रासदी में अपने प्राण गंवाने वाले लोगों को देश श्रद्धांजलि देकर याद कर रहा है।

देहरादून। प्रसिद्ध जनसेवी, विख्यात शिक्षक, ज्ञान कलश सोशल वेलफेयर एंड एजुकेशनल सोसाइटी के अध्यक्ष एवं शिक्षा रत्न की उपाधि से सम्मानित डॉ. अभिनव कपूर ने ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के अवसर पर भारत के विभाजन की विभीषिका में अपने प्राण गंवाने वाले और विस्थापन का दर्द झेलने वाले असंख्य भारतीयों को नमन किया।

इस अवसर पर जारी अपने संदेश में जनसेवी डॉ. अभिनव कपूर ने कहा- 14 अगस्त ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ पर हिंसा, उन्माद और नृशंसता की भेंट चढ़, अपने मान-सम्मान और प्राणों की आहुति देने वाली प्रत्येक पुण्यात्मा को शत्-शत् नमन।

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समाजसेवी डॉ. अभिनव कपूर ने विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों का स्मरण कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किये। उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में 14 अगस्त कभी न भूलने वाली तिथि है। आज ही के दिन मजहबी और नफरती मानसिकता ने भारत का दुःखद विभाजन किया, जिसके दुष्परिणामस्वरूप असंख्य देश वासियों ने यातनाएं झेलीं और अपनी जान गंवाई। ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के अवसर पर बलिदान हुए सभी नागरिकों को विनम्र श्रद्धांजलि। इस क्रूर-वीभत्स यातना के साक्षी सभी नागरिकों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं।

बताते चलें कि विभाजन के दौरान प्राण गंवाने वाले लोगों को याद करने के लिए आज के दिन पूरे देश में ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान त्रासदी में अपने प्राण गंवाने वाले लोगों को देश श्रद्धांजलि देकर याद कर रहा है। आजादी के समय साल 1947 में देश का विभाजन होने पर लाखों लोगों ने अपने प्राण गंवा दिए थे। इस दौरान भारत से कटकर पाकिस्तान एक नया देश बना था। इस बंटवारे ने जहां लोगों को सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक व मानसिक रूप से तोड़ा था। वहीं विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के आयोजन का मुख्य उद्देश्य विभाजन के समय जान गंवाने वालों को याद करते हुए आपस में व्याप्त भेदभाव को खत्म कर सामाजिक सद्भाव व मानव सशक्तिकरण की भावना को बढ़ाना है।

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