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अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी दिवस पर जनसेवी डॉ. अभिनव कपूर ने दी शुभकामनाएं

जनसेवी डॉ. अभिनव कपूर ने कहा- कहा कि ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है। प्रवासी भारतीय पूरे विश्व में भारत के सामर्थ्य और क्षमताओं के प्रतीक हैं। साथ ही वे भारतीय संस्कृति, संस्कारों व मूल्यों के अग्रणी दूत भी हैं।

देहरादून। प्रसिद्ध जनसेवी, विख्यात शिक्षक, ज्ञान कलश सोशल वेलफेयर एंड एजुकेशनल सोसाइटी के अध्यक्ष एवं शिक्षा रत्न की उपाधि से सम्मानित डॉ. अभिनव कपूर ने ‘अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी दिवस’ के अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं।

इस अवसर पर जारी अपने संदेश में शिक्षा रत्न डॉ. अभिनव कपूर ने कहा- विश्व के अलग-अलग देशों में रह रहे समस्त प्रवासी भाई-बहनों को ‘अन्तरराष्ट्रीय प्रवासी दिवस’ के अवसर पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

उन्होंने कहा कि ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है। प्रवासी भारतीय पूरे विश्व में भारत के सामर्थ्य और क्षमताओं के प्रतीक हैं। साथ ही वे भारतीय संस्कृति, संस्कारों व मूल्यों के अग्रणी दूत भी हैं।

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समाजसेवी डॉ. अभिनव कपूर ने कहा- हर साल 18 दिसंबर को ‘अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी दिवस’ विश्व स्तर पर मनाया जाता है। इस दिन को संयुक्त राष्ट्र द्वारा संयुक्त राष्ट्र से संबंधित एजेंसी इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) के माध्यम से चिह्नित किया जाता है। यह दिन 272 मिलियन प्रवासियों द्वारा किए गए योगदान को उजागर करने के लिए मनाया जाता है, जिसमें 41 मिलियन से अधिक लोग शामिल हैं, जो आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्ति हैं और उनके सामने हर दिन नई चुनौतियाँ सामने आती हैं।

उन्होंने कहा कि दुनियाभर में लोगों का अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर किसी वजह से बसने को अंतरराष्ट्रीय प्रवसन कहते हैं। ऐसे लोगों को ही प्रवासी कहा जाता है। प्रवासी अपना आवास हमेशा के लिए छोड़कर दूसरी जगह या दूसरे देश में अपने घर बनाते हैं। दूसरे देशों में जाकर बसने वालों के अंतरराष्ट्रीय प्रवासी कहते हैं। प्रवासियों की समस्याएं आम लोगों से थोड़ी हटकर होती है जो अधिकांशतः उनके जीवन को कठिन बना देती है।

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