‘विनाशकारी आपदाओं की ओर बढ़ते हिमालय के संरक्षण हेतु पर्यावरण नीति की आवश्यकता’ विषय पर किया जन संवाद
वक्ताओं ने दुख व्यक्त किया कि ऑल वेदर रोड के कारण लाखों पेड़ काटे गए हैं जो भू क्षरण के लिए लिए जिम्मेदार हैं। अब समय आ गया है कि उत्तराखंड के पहाड़ों में सड़कों के ऑल वेदर रोड चौड़ीकरण के कारण भविष्य में पेड़ों की गर्दन पर आरी चलाना बंद किया जाए अन्यथा प्रदूषण का पैमाना यहां भी मैदानों की तरह देखने को मिलेगा।

देहरादून। ‘विनाशकारी आपदाओं की ओर बढ़ते हिमालय के संरक्षण हेतु पर्यावरण नीति की आवश्यकता विषय’ पर मॉडल कॉलोनी वेलफेयर सोसायटी तथा संयुक्त नागरिक संगठन के संयुक्त तत्वाधान में आराघर पर एक जन संवाद का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार उत्तराखंड में 14000 का आंकड़ा पार करती भूस्खलन क्षेत्रों की संख्या पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए पर्यावरण प्रेमियों ने इसे विकास के नाम पर विनाश का प्रतीक बताया।
इनका कहना था कि राज्य सरकार द्वारा अपने स्तर पर मात्र 53 भूस्खलन क्षेत्र चिन्हित किए गए हैं। आंकड़ों की बाजीगरी में भावी आपदाओं की कल्पना से होने वाले विनाश का पैमाने का रास्ते से भटकना अकल्पनीय विनाश साबित हो सकता है। जिसकी भरपाई कुछ हजार करोड़ रुपयों से होनी असंभव होगी। इसलिए सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए तत्काल सुरक्षात्मक उपाय उठाने की जरूरत है।
बताया गया कि 1988 से 2024 के बीच 14200 से अधिक लैंडस्लाइड की घटनाएं केवल उत्तराखंड में हुई है जिसका आभास आमजन को न सरकार को है। अब समय आ गया है कि केंद्र तथा राज्य सरकारों के सभी संबंधित विभाग युद्ध स्तर पर कार्य योजना बनाएं। इनका यह भी विचार था कि सरकार शासन प्रशासन वन विभाग सभी हिमालय बचाओ के लिए गला फाड़ फाड़ कर शपथ ले रहे हैं पर यह कैसे बचेगा? इस प्रश्न का उत्तर किसी के पास नहीं है। सरकार को शीघ्र पर्यावरण संरक्षण हेतु सक्रिय सभी लोगों को मुख्य सेवक सदन में जन संवाद आयोजित कर इसमें प्राप्त सुझावों के आधार पर कार्य योजना बनानी होगी। एयर कंडीशन कमरों में बैठकर सरकारी एजेंसियों के भरोसे आपदाओं पर नियंत्रण सफल नहीं हो पाएगा, पहाड़ों मैदानो के सभी संवेदनशील स्थानों का धरातलीय सर्वेक्षण स्थानीय निवासियों के साथ भी करना जरूरी होगा।
वक्ताओं ने दुख व्यक्त किया कि ऑल वेदर रोड के कारण लाखों पेड़ काटे गए हैं जो भू क्षरण के लिए लिए जिम्मेदार हैं। अब समय आ गया है कि उत्तराखंड के पहाड़ों में सड़कों के ऑल वेदर रोड चौड़ीकरण के कारण भविष्य में पेड़ों की गर्दन पर आरी चलाना बंद किया जाए अन्यथा प्रदूषण का पैमाना यहां भी मैदानों की तरह देखने को मिलेगा। इस अवसर पर पर्यावरणविद् सुरेश भाई को वरिष्ठ नागरिकों ने शॉल उड़ाकर सम्मानित भी किया। समापन पर नीम,आम, कनेर आदि प्रजातियों के पेड़ भी यहां लगाए गए।
कार्यक्रम में सुरेश भाई के अतिरिक्त पद्यश्री कल्याण सिंह रावत मैती, ब्रिगेडियर केजी बहल, वृक्षाबंधन अभियान के मनोज ध्यानी, दिनेश भंडारी, अशालाल टम्टा, सुशील त्यागी, डॉ. राकेश डंगवाल, बीपी ममगाई, उमेश्वर सिंह रावत, देवकी बिष्ट, पुष्पा भंडारी, सुनीता पंडित, राकेश गोदियाल, सुरेश कनौजिया एवं आरती तिवारी आदि शामिल थे।




