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PM मोदी ने किए उडुपी के श्री कृष्ण मठ के दर्शन, आध्यात्मिक गुरु श्री माधवाचार्य को भी किया याद

उडुपी के ऐतिहासिक श्री कृष्ण मठ पहुंचकर PM मोदी ने दर्शन किए। इस दौरान, उन्होंने 13वीं शताब्दी के आध्यात्मिक गुरु श्री माधवाचार्य को भी नमन किया।

उडुपी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को उडुपी के ऐतिहासिक श्री कृष्ण मठ पहुंचे। प्रधानमंत्री ने यहां “लक्ष गीता पाठन” में भाग लिया। यह एक ऐसा सामूहिक पाठ है जिसमें 1 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने भगवद् गीता के श्लोकों का पाठ किया। प्रधानमंत्री मोदी ने श्री कृष्ण मंदिर में प्रार्थना की और पीठासीन पर्याय स्वामीजी से आशीर्वाद लिया। जान लें कि ये पीएम मोदी का उडुपी का तीसरा दौरा है। वह दूसरी बार श्री कृष्ण मठ दर्शन के लिए आए। पीएम मोदी पहली बार 1993 में उडुपी की यात्रा पर आए थे और उसके बाद वह 2008 में तब उडुपी आए थे जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे। इस दौरान, प्रधानमंत्री ने श्री कृष्ण मंदिर का दौरा भी किया था।

राम मंदिर आंदोलन में क्या है उडुपी का रोल?

श्री कृष्ण मठ में दर्शन के बाद पीएम मोदी ने कहा कि उडुपी ने 5 दशक पहले नया शासन मॉडल पेश किया था। राम जन्मभूमि आंदोलन में उडुपी के रोल से पूरा देश वाकिफ है। श्री विश्वेश तीर्थ स्वामीजी के मार्गदर्शन की वजह से ही अयोध्या में राम मंदिर के शिखर पर ध्वज फहरा। राम मंदिर में एक विशेष द्वार है जो उडुपी के श्री माधवाचार्य को समर्पित है।

गीता की शिक्षाओं पर क्या बोले पीएम मोदी?

पीएम मोदी ने कहा कि ”कनक विंडो” के जरिए उडुपी मंदिर में श्रीकृष्ण की झलक मुझे संत कवि कनकदास की याद दिलाती है। इस दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने गीता पर भी बात की। उन्होंने कहा कि गीता में श्रीकृष्ण की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं। भगवान श्रीकृष्ण, गीता में हमें लोक कल्याण का काम करने के लिए कहते हैं।

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प्रधानमंत्री के दौरे के लिए खास तैयारी

उडुपी जिले के अधिकारियों के मुताबिक, पीएम मोदी के आने से पहले यहां खास तैयारियां की गईं। बड़ी संख्या में लोगों के आने के मद्देनजर मंदिर परिसर, आसपास की सड़कों और सार्वजनिक सभा स्थलों को तैयार किया गया। इसी के साथ मेडिकल टीम, इमरजेंसी रिस्पॉन्स यूनिट और स्वयंसेवी समूह भी मौके पर मौजूद रहे।

वैष्णववादी परंपराओं की तरफ खिंचा ध्यान

जानकारों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे से उडुपी की आध्यात्मिक पहचान रेखांकित हुई। इस क्षेत्र की वैष्णववादी परंपराओं की तरफ नए सिरे से देश-दुनिया के लोगों का ध्यान गया।

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