सांसद महावीर त्यागी की 126 वीं जयंती पर अर्पित किए श्रद्धा सुमन
अ.भा. स्वतंत्रता सेनानी एवं शहीद परिवार कल्याण महापरिषद तथा संयुक्त नागरिक संगठन द्वारा संयुक्त रूप से उज्जवल रेस्टोरेंट में आयोजित की गई गोष्ठी।

देहरादून। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी देहरादून की लोकसभा सीट के पहले कांग्रेसी सांसद महावीर त्यागी की 126 वीं जयंती पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए।
अ.भा. स्वतंत्रता सेनानी एवं शहीद परिवार कल्याण महापरिषद तथा संयुक्त नागरिक संगठन द्वारा संयुक्त रूप से उज्जवल रेस्टोरेंट, परेड ग्राउंड में आयोजित गोष्ठी की अध्यक्षता अवधेश पंत ने की।
दून में दशकों बाद की गई इस पहल में महावीर त्यागी के नाती सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता अनिल नौरिया भी शामिल थे जिन्होंने त्यागी के व्यक्तित्व त्याग, समर्पण से संबंधित कई स्मरण सुनाए।
त्यागी के चित्र पर सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने इनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। संचालन अवधेश पंत ने किया।
गोष्ठी में डीएवी कालेज पी जी कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य दिनेश सक्सेना ने इनके आजादी के आंदोलन में दिए गए योगदान को अभूतपूर्व बताया।
अवधेश पंत ने कहा पूर्व सांसद के इस कथन “क्या इसलिए चुनवाए थे तकदीर ने तिनके ,कि बन जाय नशेमन तो कोई आग लगा दे” आज भी सत्ताधारियों को सार्थक संदेश दे रहा है।
मैती के पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ने कहा जलियांवाला बाग कांड में हुए नरसंहार से आक्रोशित त्यागी महात्मा गांधी के नेतृत्व में हुए आंदोलनों में कई बार गिरफ्तार हुए और तत्कालीन संयुक्त प्रांत के बिजनौर, नगीना, मेरठ, फैजाबाद, नैनी, आगरा, बुलंदशहर की जेलों में 11 वर्ष कैद में बिताए।
त्यागी सभा के राम नरेश त्यागी ने बताया 1925 में देशभक्त शर्मदा त्यागी से विवाह होने के बाद ये दून के निवासी बन गए। यहां शहर तथा पहाड़ी क्षेत्रों में आजादी के संग्राम का डंका बजाने लगे।
अवधेश शर्मा ने बताया दून के जौनसार भाबर क्षेत्र में भूमि सुधार व किसानों के कर्ज की समस्या को हल करने के लिए बनी कमेटी के माध्यम से इन्होंने कर्ज मुक्ति कानून भी बनवाया था।
गिरीश चंद्र भट्ट ने कहा वे त्याग तपस्या और लगन के पक्के परन्तु भावुक, ईमानदार, समर्पित कांग्रेस के नेता थे।
समन्वय समिति के एस एस गुसाई ने कहा वे संविधान सभा केहै भी सदस्य रहे और 1967 तक तीन लोकसभाओं में इन्होंने दून की लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया।
जगमोहन मेंदीरत्ता ने बताया ओ.एन.जी.सी, आई.आई.पी. तथा लाल बहादुर शास्त्री अकादमी मसूरी और हरिद्वार में बी.एच.ई.एल. जैसे प्रतिष्ठानों की स्थापना में पूर्व सांसद का महत्वपूर्ण योगदान था।
सुशील त्यागी ने कहा केंद्र सरकार में उन्होंने राजस्व तथा रक्षा मंत्री के रूप में भी कार्य किया। उन्होंने बैंगलोर के हिंदुस्तान एयरोनॉटिकल लिमिटेड में हवाई जहाजों का निर्माण कार्य भी शुरू कराया।
अनिल नौरिया के अनुसार 1957 में वे डायरेक्ट टैक्सेज एडमिनिस्ट्रेशन इंक्वायरी कमेटी के चेयरमैन तथा 1962 में पब्लिक अकाउंट्स कमेटी के अध्यक्ष भी रहे। 1964 में वे मिनिस्टर फॉर रिहैबिलिटेशन रहे। विभिन्न पदों पर रहते हुए त्यागी ने अपनी योग्यता से व्यवस्थाओं में सुधार का मार्ग प्रशस्त किया।
वक्ताओं के अनुसार देहरादून में इनकी याद में त्यागीरोड और सहस्त्रधारा चौक का नामकरण महावीर त्यागी चौक करना दून वासियों के सम्मान का प्रतीक है। वक्ताओं ने इस चौक पर महावीर त्यागी की प्रतिमा स्थापित करने की भी सरकार से मांग की है।
अन्य वक्ताओं में सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के सत्य प्रकाश चौहान, बीएस नेगी, रेड क्रॉस समित के मोहन सिंह खत्री, दिनेश भंडारी, डॉ एस के गोविल, प्रेम खन्ना, उमेश्वर सिंह रावत, एस के चावला, राकेश पंत, वीरेंद्र त्यागी, टीटू त्यागी जगदीश बावला आदि थे।




