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देहरादून में बढ़ते सड़क हादसों को लेकर संयुक्त नागरिक संगठन के शिष्ट मंडल ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारी से की मुलाकात

वन्यजीवों की सुरक्षा को और सुदृढ़ बनाने के लिए परियोजना में ग्रीन गाइड हेज, साउंड बैरियर, एंटी-ग्लेयर स्क्रीन, वन्यजीव चेतावनी संकेतक, स्पीड कैल्मिंग उपाय तथा 'नो हॉर्न' जोन जैसी व्यवस्थाएँ भी शामिल की गई है।

देहरादून। आशा रोड़ी से मोकमपुर तक प्रस्तावित एलिवेटेड रोड बनने से मोहब्बत वाला ब्लैक स्पॉट पर होने वाले हादसे को रोका जा सकेगा इससे दूर शहर में भी यातायात का दबाव कम होकर जाम से भी निजात मिल सकेगी। यह आश्वासन आज संयुक्त नागरिक संगठन के शिष्ट मंडल को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के प्रांतीय कार्यालय में रीजनल ऑफिसर आर ओ दिनेश चतुर्वेदी द्वारा दिया गया।

इस अवसर पर प्राधिकरण की अन्य अधिकारी भी साथ थे। संगठन का शिष्ट मंडल हाल में मोहब्बत वाला ब्लॉक स्पॉट पर हो रहे निरंतर हादसों से चिंतित था। भानियावाला ऋषिकेश मार्ग के चौड़ीकरण में पर्यावरण क्षति को मानते रखने की पुरजोर मांग पर अधिकारियों ने बताया कि पर्यावरणीय प्रभाव कम करने के लिए परियोजना के वन क्षेत्र में आरओडब्लू को 60 मीटर से घटाकर मात्र 23 मीटर किया गया है, जिससे अनावश्यक वन क्षेत्र प्रभावित होने से बचाया जा सकेगा।

एनएचएआई ने प्रतिपूरक वनीकरण तथा उसके अगले 10 वर्षों के रखरखाव के लिए ₹1.97 करोड़ से अधिक की राशि वनविभाग को जमा की है।प्रतिपूरक वनीकरण एवं राज्य में हरित क्षेत्र बढ़ाने के उद्देश्य से 40 हेक्टेयर गैर-वन भूमि राज्य सरकार द्वारा वन विभाग को हस्तांतरित की गई है, जिससे भविष्य में व्यापक स्तर पर नए वन विकसित किए जा सकेंगे। बताया गया कि परियोजना में हाथियों एवं अन्य बड़े वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए 01 प्रमुख ब्रिज-कम-एलीफेंट अंडरपास तथा 04 समर्पित एलीफेंट अंडरपास (लगभग 3.5 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड संरचना) का निर्माण किया जा रहा है।

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इसके अतिरिक्त बाघ, तेंदुआ, सियार, जंगल बिल्ली, सेही, जंगली सूअर, सांभर एवं चीतल जैसे वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए 5×3 मीटर आकार के 06 बॉक्स कल्वर्ट तथा सरीसृप, उभयचर एवं अन्य छोटे वन्यजीवों के लिए 1200 मिमी व्यास के 13 पाइप कल्वर्ट विकसित किए जा रहे हैं। वन्यजीवों की सुरक्षा को और सुदृढ़ बनाने के लिए परियोजना में ग्रीन गाइड हेज, साउंड बैरियर, एंटी-ग्लेयर स्क्रीन, वन्यजीव चेतावनी संकेतक, स्पीड कैल्मिंग उपाय तथा ‘नो हॉर्न’ जोन जैसी व्यवस्थाएँ भी शामिल की गई है।

परियोजना से प्रभावित 4,369 वृक्षों में से 754 वृक्षों को फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक आकलन के आधार पर प्रत्यारोपित किया जाएगा।संगठन ने दून शहर के आंतरिक मार्गों पर बढ़ते ट्रैफिक जाम के विकल्प के रूप में सड़कों पर एलिवेटेड रोड बनाकर सभी इलाकों को आपस में जोड़ने की भी मांग की।

शिष्टमंडल में उमेश सक्सैना, अतुल कुमार गुप्ता, उमेश्वर सिंह रावत, प्रदीप कुकरेती, अवधेश शर्मा, सुशील त्यागी एवं नीलेश राठी शामिल थे।

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