सड़कों को गड्ढा मुक्त रखने के लिए संयुक्त नागरिक संगठन ने दिए सुझाव
संगठन द्वारा इस अवसर पर मांग पत्र भी सोपा गया जिसमें निम्नलिखित सुझाव शामिल थे। राजधानी दून की पीडब्ल्यूडी के नियंत्रणाधीन सभी सड़कों का क्षेत्रवार सर्वे कराया जाय जिसमे सड़क का नाम, कहाँ से कहाँ तक, गढ्ढों की संख्या, टूटे किनारे, जलभराव, असमान रोड-शोल्डर आदि के विवरण फोटो व वीडियो एवं लोकेशन सहित दर्ज हो।

देहरादून। संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत सुरक्षित और गड्ढा मुक्त सड़कों व फुटपाथों पर चलना नागरिकों के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार है। सरकारी जिम्मेदारी भी है कि सब मंत्री संत्री साल भर सड़कों को गड्ढा मुक्त रखे। ये बात संयुक्त नागरिक संगठन ने सार्वजनिक निर्माण विभाग कार्यालय में आयोजित संवाद में कही।
दून की बेहाल सड़कों के गड्ढों, ऊंचे-नीचे लोहे के ढक्कनों तथा सड़कों के दोनों किनारो के रोड शोल्डर से विक्रमों, थ्री व्हीलर्स, बाइक स्कूटी सवार वाहन चालकों तथा इनमें बैठे बीमार बुजुर्गों- महिलाओं, बच्चों को लगने वाले मानसिक शारीरिक झटकों की पीड़ाओं के स्थाई समाधान हेतु अनेक सुझावों के साथ संयुक्त नागरिक संगठन का शिष्टमंडल राज्य के सार्वजनिक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता, राजेश शर्मा से मिला।
संवाद में विभागीय अधिकारी भी शामिल थे। संगठन द्वारा इस अवसर पर मांग पत्र भी सोपा गया जिसमें निम्नलिखित सुझाव शामिल थे। राजधानी दून की पीडब्ल्यूडी के नियंत्रणाधीन सभी सड़कों का क्षेत्रवार सर्वे कराया जाय जिसमे सड़क का नाम, कहाँ से कहाँ तक, गढ्ढों की संख्या, टूटे किनारे, जलभराव, असमान रोड-शोल्डर आदि के विवरण फोटो व वीडियो एवं लोकेशन सहित दर्ज हो। गड्ढों का फौरी भरान न होकर उचित कटिंग, सतह की तैयारी, बिटुमिन समिश्रण, कम्पैक्शन एवं सीलिंग के साथ टिकाऊ मरम्मत कराई जाए। मार्ग पर बने गड्ढों (पैचो) को वर्गाकार में काटकर, उनमें जमा हुए मिट्टी आदि को अच्छी तरह साफ करके ही गर्म मिश्रण को भरा जाय।

गड्डो़ को, तारकोल सतह की मोटाई जो 20 मिमी से 25 मिमी गहराई तक होती है चौकोर आकार में काटना अति आवश्यक है। इसी प्रकार जहाँ सड़क की सतह मार्ग के पत्थर की सतह तक कट कर गड्डे बन जाते हैं उनको 10 से 12 सेमी तक गहरे काटकर नीचे पत्थर भर कर फिर गर्म हुए मिश्रण डालकर पैचवर्क होना चाहिए। मुख्य सड़क और उसके दोनों ओर के कच्चे व पक्के शोल्डर का लेवल यथासंभव समान रखा जाए, ताकि जाम के समय वाहन सड़क से उतरते-चढ़ते हुए दुर्घटना का शिकार न हों। निर्माण एवं मरम्मत सामग्री की स्वतंत्र गुणवत्ता जाँच व थर्ड-पार्टी टेस्टिंग कराई जाए और कार्य पूर्ण होने के बाद संबंधित ठेकेदार की जवाबदेही निश्चित अवधि तक तय हो।
अस्पताल, स्कूल, वृद्धजन आवागमन वाले क्षेत्र तथा अत्यधिक यातायात वाली सड़कों को प्राथमिकता श्रेणी में लेकर सुधार कराया जाय। बिजली, पेयजल, सीवर, गैस अथवा अन्य विभागों द्वारा सड़क खोदने के बाद उसकी समुचित पुनर्स्थापना की जिम्मेदारी और समयसीमा पहले से तय हो। नागरिकों से प्राप्त शिकायतों की एक Road Problem Remedy Register बनाकर प्रत्येक शिकायत को क्रमांक दिया जाए और संबंधित PWD अधिकारी को भेजकर उसकी कार्रवाई की स्थिति भी सार्वजनिक रूप से साझा की जाए. मुख्य अभियंता ने आश्वासन दिया कि अब नए पीबीएमसी नियमों के अनुसार ठेकेदार को पैसा सिर्फ सड़क बनाने का ही नहीं बल्कि उसे हमेशा बेहतर (सभी मौसम में) बनाए रखने पर ही भुगतान किया जाएगा। ठेकेदार की निरंतर 5 साल सड़कों को सुविधाजनक बनाए रखने की जिम्मेदारी लेनी होगी।
सड़कों पर गढ्ढों या ड्रेनेज चौक होने पर 2 दिन के भीतर उसे ठीक करना होगा। एक ही बार में मजबूत व टिकाऊ काम करना ठेकेदार की जिम्मेदारी होगी। आधुनिक तकनीक से सड़कों की निगरानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी सिस्टम से भी की जाएगी। इसकी मॉनिटरिंग के लिए स्वतंत्र सुपरविजन कंसल्टेंट की भी नियुक्ति की जा रही है। कार्यप्रणाली में बदलाव और नई निगरानी व्यवस्था पर संगठन ने खुशी जाहिर करते हुए कहा की निगरानी तंत्र में जनसहयोग भी लिया जाना प्रधानमंत्री की अपेक्षा अनुसार होगा, इसलिए सामाजिक संस्थाओं को भी इसमें जोड़ा जाए। दून के अनेक क्षेत्रों की सड़कों के खराब हालात पर संगठन की ओर से अनेक मामले सामने ले गए जिन पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश भी मुख्य अभिव्यता द्वारा अधिकारियों को दिए गए।
शिष्टमंडल में बिपिन चंद्र शर्मा, रोहित कोचवे, गिरीश चंद्र भट्ट, उमेश सक्सेना, प्रदीप कुकरेती, सुशील त्यागी, अवधेश शर्मा, अमर सिंह धुनता, मोहन खत्री एवं दिनेश भंडारी आदि शामिल थे।




