पर्यावरणप्रेमियों के विरोध के बीच हरे पेड़ों पर चली आरी, काटे गए सौ पेड़
भानियावाला-ऋषिकेश फोरलेन निर्माण के लिए पेड़ों की कटाई शुरू होते ही मौके पर भावुक कर देने वाला दृश्य देखने को मिला। वर्षों पुराने पेड़ों पर चली आरी के बीच पर्यावरण प्रेमी बेबस नजर आए और कई की आंखों से आंसू छलक पड़े। विरोध-प्रदर्शन के बावजूद पहले चरण में करीब सौ पेड़ों का कटान किया गया, जबकि परियोजना के लिए तीन हजार से अधिक पेड़ों को हटाने का प्रस्ताव है।

ऋषिकेश। भानियावाला-ऋषिकेश फोरलेन मार्ग निर्माण के लिए चार दिन बाद पेड़ों का कटान शुरू हो गया है। पेड़ कटान में पर्यावरणप्रेमी व्यवधान न डालें इसके लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। हल्के-फुल्के विरोध के बीच पेड़ों का कटान किया गया। सोमवार को करीब 100 पेड़ काटे गए।
सोमवार की सुबह भानियावाला-ऋषिकेश फोरलेन मार्ग पर एक अजीब सी खामोशी थी। भारी पुलिस बल तैनात था, मशीनें तैयार थीं और सामने खड़े थे वे लोग, जो पिछले कई दिनों से पेड़ों को बचाने की लड़ाई लड़ रहे थे। कुछ ही देर में जैसे ही पहली आरी चली और वर्षों पुराना एक विशाल पेड़ भरभराकर जमीन पर गिरा, वहां खड़े कई पर्यावरण प्रेमियों की आंखें छलक पड़ीं। किसी ने दोनों हाथों से चेहरा ढक लिया, कोई सड़क किनारे बैठकर फफक-फफक कर रोने लगा तो कोई बीच सड़क पर बैठकर कटान रोकने की आखिरी कोशिश करता रहा। लेकिन पुलिस के घेरे और प्रशासनिक व्यवस्था के सामने उनकी एक नहीं चली।
आंदोलन के कारण पेड़ों का कटान रोक गया था
भानियावाला-ऋषिकेश फोरलेन परियोजना के लिए संरक्षित प्रजाति के तीन हजार से अधिक पेड़ों का कटान प्रस्तावित है। पेड़ों को बचाने के लिए पर्यावरण प्रेमी, सामाजिक संगठन और स्थानीय लोग पिछले कई दिनों से लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। उनका कहना था कि विकास जरूरी है, लेकिन विकास की कीमत हजारों पेड़ों और पर्यावरण को उजाड़कर नहीं चुकाई जानी चाहिए।
विरोध को देखते हुए वन निगम और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने पहले ही पुलिस सुरक्षा की मांग की थी। बीते बृहस्पतिवार से आंदोलन के कारण पेड़ों का कटान रोक दिया गया था, लेकिन सोमवार को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में फिर से आरियां चलनी शुरू हो गईं।
वन विभाग के अधिकांश कर्मचारी भी असहज
भानियावाला-ऋषिकेश फोरलेन परियोजना के लिए बरसात के मौसम में हो रहे पेड़ों के कटान को लेकर वन विभाग के कई कर्मचारी भी असहज महसूस कर रहे हैं। विभाग के अधिकांश कर्मचारी खुलकर कुछ भी बोलने से बचते रहे, लेकिन अनौपचारिक बातचीत में कई कर्मचारियों ने माना कि यह समय पेड़ काटने का नहीं, बल्कि पौधरोपण का है। कर्मचारियों का कहना था कि बरसात का मौसम हरियाली बढ़ाने और नए पौधे लगाने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। ऐसे समय में बड़ी संख्या में पेड़ों का कटान होना उन्हें भी उचित नहीं लगता।
तीन हजार से अधिक पेड़ हैं काटे जाने
भानियावाला-ऋषिकेश फोरलेन मार्ग के लिए 19 किमी के दायरे में संरक्षित प्रजाति के करीब तीन हजार से अधिक पेड़ काटे जाने हैं। करीब डेढ़ सप्ताह पूर्व पेड़ों का कटान शुरू हुआ था। लेकिन यहां लगातार पर्यावरणप्रेमी पेड़ों के कटान का विरोध कर रहे थे। बीते बृहस्पतिवार को वन निगम ने यह कह कर पेड़ों का कटान बंद कर दिया था कि जब तक पर्याप्त पुलिस बल तैनात नहीं किया जाता, पेड़ों का कटान नहीं किया जाएगा। सोमवार को सुबह 9 बजे से पहले ही पेड़ कटान वाले स्थान पर पुलिस तैनात कर दी गई थी। हालांकि पेड़ों के कटान का विरोध करने वाले पर्यावरण प्रेमियों की संख्या भी अन्य दिनों की तुलना काफी कम थी, जिससे हल्के-फुल्के विरोध के बीच पेड़ों का कटान शुरू हुआ। जो देर शाम तक चलता रहा।
कार्य में व्यवधान के आरोप में दो गिरफ्तार
पेड़ों के कटान कार्य के विरोध के दौरान एक पर्यावरण प्रेमी पेड़ों से चिपक गया तो एक युवक बीच हाईवे पर बैठ गया। पुलिस व वनकर्मियों के काफी समझाने के बाद भी जब पर्यावरण प्रेमी नहीं माने तो पुलिस दोनों को उठाकर कोतवाली ले आई। एक महिला रोते हुए कही कि हम लाशों (कटे हुए पेड़ों) पर खड़े होकर सिर्फ रो सकते हैं। प्रभारी निरीक्षक यशपाल सिंह बिष्ट ने बताया कि दोनों व्यक्तियों को समझाने का भरसक प्रयास किया गया, बावजूद कार्य में बाधा उत्पन्न करना जारी रखा गया। जिस पर कुंदन सिंह बिष्ट व रणविजय सिंह के खिलाफ शांति भंग के आरोप में चालानी कार्रवाई की गई।
मजदूरों की संख्या बढ़ेगी
वन निगम के अधिकारियों ने बताया कि इस माह के अंत तक कटान कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। हर दिन कम से कम 200 पेड़ काटे जाएंगे। मंगलवार से मजदूरों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। अभी करीब 16 मजदूर पेड़ कटान में लगे हुए हैं। इसके अलावा दो जेसीबी व हाइड्रा मशीन भी कटान कार्य में लगे हैं।
सोमवार को करीब 100 पेड़ काटे गए हैं। अब प्रतिदिन 200 पेड़ काटने का लक्ष्य रखा गया है। इस माह के अंत तक कार्य पूर्ण करने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
– डीआर सेमवाल, अनुभाग अधिकारी, वन निगम




