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जनसेवी डॉ. अभिनव कपूर ने विश्व वन्यजीव दिवस के अवसर पर दी शुभकामनाएं

जनसेवी डॉ. अभिनव कपूर ने कहा कि 3 मार्च 2014 को पहली बार विश्व वन्यजीव दिवस मनाया गया था। दुनियाभर में जीव-जंतुओं और वनस्पतियों की अनेक प्रजातियां धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही हैं। भारत में इस समय 900 से भी ज्यादा जीवों की प्रजातियां खतरे में हैं।

देहरादून। प्रसिद्ध जनसेवी, विख्यात शिक्षक, ज्ञान कलश सोशल वेलफेयर एंड एजुकेशनल सोसाइटी के अध्यक्ष एवं शिक्षा रत्न की उपाधि से सम्मानित डॉ. अभिनव कपूर ने ‘विश्व वन्यजीव दिवस’ के अवसर पर शुभकामनाएं दी एवं सभी से इनके संरक्षण एवं संवर्धन हेतु प्रयास करने की अपील की।

इस अवसर पर जारी अपने संदेश में जनसेवी डॉ. अभिनव कपूर ने कहा- समस्त देश वासियों एवं प्रकृति प्रेमियों को ‘विश्व वन्य जीव दिवस’ की हार्दिक शुभकामनाएं। वन्य जीव प्रकृति की अमूल्य धरोहर हैं। ‘विश्व वन्य जीव दिवस’ के अवसर पर, आइए हम सभी मिलकर संकल्प लें कि मानव और प्रकृति के कल्याण हेतु वन्यजीवों तथा वनस्पतियों के संरक्षण की दिशा में जागरूकता को बढ़ावा देंगे व इनके संरक्षण एवं संवर्धन हेतु प्रयास करेंगे।

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‘विश्व वन्य जीव दिवस’ के बारे में चर्चा करते हुए शिक्षा रत्न डॉ. अभिनव कपूर ने कहा कि वन्य जीवों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए हर साल 3 मार्च का दिन वन्यजीव दिवस के रूप में मनाया जाता है। वन्यजीवों से हमें भोजन तथा औषधियों के अलावा भी अनेक प्रकार के फायदे मिलते हैं। इसके अलावा वन्यजीव जलवायु को संतुलित रखने में भी सहायता करते हैं। दुनियाभर में लुप्त हो रही वनस्पतियों और जंगली जीव-जंतुओं की प्रजातियों के संरक्षण के उद्देश्य से यह दिवस मनाया जाता है।

उन्होंने कहा कि 3 मार्च 2014 को पहली बार विश्व वन्यजीव दिवस मनाया गया था। दुनियाभर में जीव-जंतुओं और वनस्पतियों की अनेक प्रजातियां धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही हैं। भारत में इस समय 900 से भी ज्यादा जीवों की प्रजातियां खतरे में हैं। पृथ्वी की जैव विविधता को बनाए रखने के लिए वनस्पतियां और जीव-जंतु बहुत जरूरी हैं। लेकिन पर्यावरण के असंतुलन और तरह-तरह के प्रयोगों की वजह से कईं जीव और वनस्पतियों का अस्तित्व खतरे में है। समय रहते इस ओर ध्यान न दिया गया तो स्थिति और भी खतरनाक हो सकती है।

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