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बड़े पर्दे पर धमाल मचाने आ रही हैं कंगना, एक्शन देख खड़े हो जाएंगे रोंगटे

मुंबई। ब्रितानी हुकूमत को अपने शौर्य से हिला देने वाली झांसी की महारानी लक्ष्मीबाई का शौर्य एक दफा फिर सिनेमा के पर्दे पर साकार होने जा रहा है। यह फिल्म हिन्दुस्तान में किस जज्बात से देखी जाएगी कुछ माह पहले देश भर में चर्चित रहा ट्रेलर ही बता गया था। कंगना रनौत की केन्द्रीय भूमिका में यह फिल्म गणतंत्र दिवस पर देश भर के मल्टीप्लैक्स व सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। फिल्म रिलीज से पहले सोशल मीडिया में भरपूर चर्चा में है। हर कोई सफेद घोड़े पर सवार रानी लक्ष्मीबाई बनी कंगना को जब दास्ता के प्रतीक यूनियन जैक को तलवार से भेदते देखता है तो एक पल को रोयां रोयां खड़ा हो जाता है। ये स्वाभाविक प्रतिक्रिया ही भारत में महारानी लक्ष्मीबाई के प्रति अगाध श्रद्धा को बयां करती है। फ़िल्म वास्तव में हिन्दुस्तान के माथे की मणि की जीवटता देश दुनिया को बताने जा रही है।

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1857 के संग्राम में ब्रितानी हुकूमत को उखाड़ फेंकने का जो युद्ध शुरू हुआ उसमें झांसी की रानी का नाम अदम्य शौर्य और वीरता के लिए अमर हो गया है। रूपहले पर्दे से समाज और कला के विभिन्न मंचों तक रानी लक्ष्मीबाई को देशवासियों ने अपने अपने तरीकों से पूजा है। महारानी लक्ष्मीबाई पर मणिकर्णिका फिल्म हम 19 जनवरी 2019 को देख पाएंगे। इस फिल्म में कंगना रनौत तलवार से फिरंगियों को खदेड़ती हुई पूरे हिन्दुस्तान की रानी लक्ष्मीबाई बन जाएंगी। कंगना हिन्दी सिनेमा में विद्रोही स्वभाव की अदाकारा के रूप में सामने आयी हैं।

तनु वेड्स मनु और तनु वेडस मनु रिटर्न दोनों में कंगना का किरदार परंपरागत नायिका की फ्रेम को तोड़ता नजर आता है। फिल्म में बिंदास तनु शर्मा और हरियाणवी एथलीट तनु के डबल रोल में वे अपना प्रभाव छोड़ने में कामयाब रहीं थीं। मणिकर्णिका के लिए अगर जी ने उन्हें चुना है तो इसके लिए उनका स्पष्टवादी और कुछ हद तक विद्रोही अवचेतन भी निर्देशक के ध्यान में रहा होगा। पर्दे पर अभिनय करते समय कलाकार खुद को आधा बदल सकता है पूरा नहीं।
मणिकर्णिका में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ तलवार उठाए वही अदाकारा न्याय कर सकती थी जो वीर रस के भाव को अपने अंर्तमन में समाहित किए हो। हिन्दी सिनेमा में शेखर सुमन से लेकर ऋतिक रोशन से हुए निजी विवाद में कंगना रनौत का विद्रोही स्वभाव मीडिया की सुर्खियां बना था। ये फिल्मकार की कुशलता होगी अगर वो विद्रोही भाव अंग्रेजी हुकुमत के खिलाफ मणिकर्णिका के फिल्मांकन में वे कंगना के अंदर से निकलवा पाए। मणिकर्णिका से पहले महारानी लक्ष्मीबाई पर पूर्व में भारत की पहली मिस यूनिवर्स सुष्मिता सेन भी फिल्म बनाना चाहती थीं। अगर ये फिल्म बनती तो दर्शक समय फिल्म में एसीपी के सख्त रोल में दिखीं सुष्मिता को अश्वारोही लक्ष्मीबाई के रूप में देख पाते।

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