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इंदिरा गाँधी की जयंती पर संयुक्त नागरिक संगठन ने आयोजित की विचार गोष्ठी

इस अवसर पर दूनवासियों ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए श्रद्धासुमन भी अर्पित किए। कार्यक्रम में स्वतंत्रता सेनानी वंशज भी शामिल थे।

देहरादून। हिंदुस्तान किसी से नहीं डरता चाहे सातवां बेड़ा हो या सत्तरवां, देश की लौह महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के ये शब्द आज भी प्रेरक हैं। 1971 के युद्ध के दौरान गांधी ने अमेरिका को स्पष्ट चेतावनी देते कहा था कि कोई भी देश भारत को आदेश देने का दुस्साहस ना करें।

वक्ताओं के ये विचार इंदिरा गांधी की 106वीं जयंती पर संयुक्त नागरिक संगठन द्वारा “भारत को सशक्त आत्मनिर्भर बनाने में इंदिरा गांधी का योगदान” विषय पर प्रेस क्लब के पास स्थित रेस्टोरेंट में आयोजित विचार गोष्ठी में अभिव्यकत किए गए।

इस अवसर पर दूनवासियों ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए श्रद्धासुमन भी अर्पित किए। कार्यक्रम में स्वतंत्रता सेनानी वंशज भी शामिल थे। वक्ताओं ने 1969 में देश की बैंकिंग सेवाओं को गरीबों तथा किसानों तक पहुंचाने के लिए, भारतीय अर्थव्यवस्था के समाजवादी स्वरूप को मजबूत करने के लिए बैंकों के राष्ट्रीयकरण के निर्णय को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया तथा कहा कि 1974 में देश का पहला परमाणु परीक्षण कर भारत को दुनिया की छठी परमाणु शक्ति बनाना सशक्त भारत का प्रतीक था।

वक्ताओं ने कहा, 1971 के भारत पाक युद्ध में जीत के बाद पाकिस्तान के दो टुकड़े करके देश ने साबित कर दिया था कि हम अमेरिका जैसी साम्राज्यवादी शक्तियों की चुनौतियों का भी वक्त आने पर साहस के साथ सामना कर सकते हैं और ऐसे समय में भारत के अभिन्न मित्र रूस हमेशा देश के साथ खड़ा है। सेनानी वंशजों के उदगार थे कि इंदिरा गांधी की पहल पर ही भारत सरकार ने 1972 में देश के 1,71,689 स्वतंत्रता सेनानियों को “स्वतंत्रता सैनिक सम्मान योजना” के अंतर्गत केंद्रीय पेंशन स्वीकृत की थी जिसके लिए ये राष्ट्रीय परिवार इनके हमेशा कृतज्ञ रहेंगे।

वक्ताओं में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के सेवानिवृत प्रमोद गर्ग, स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के सत्यप्रकाश चौहान, दून सिटीजन काउंसिल के जगमोहन मेंदीरत्ता, पूर्व सैनिक कल्याण परिषद के मेजर एमएस रावत, स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी महापरिषद के अवधेश पंत, सेवानिवृत सचिवालय अधिकारी एसोसिएशन के गिरीश चंद्र भट्ट, सचिव संयुक्त नागरिक संगठन देहरादून सुशील त्यागी, संयुक्त नागरिक संगठन के अवधेश शर्मा, स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी कल्याण समिति की आशा लाल, समाजसेवी जगदीश घिल्डियाल, यातायात जागरूकता अभियान से संबद्ध उमेश्वर सिंह रावत आदि शामिल थे।

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