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ED की बड़ी कार्रवाई, कांग्रेस विधायक सतीश कृष्ण सेल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार

कर्नाटक कांग्रेस के विधायक सतीश कृष्ण सेल को गिरफ्तार किया गया है। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ये बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले के सामने आने के बाद कर्नाटक में कांग्रेस की छवि को नुकसान पहुंच सकता है।

बेंगलुरु। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है और कर्नाटक कांग्रेस के विधायक सतीश कृष्ण सेल को गिरफ्तार कर लिया है। कांग्रेस विधायक सतीश कृष्ण सेल को राज्य में कथित अवैध लौह अयस्क निर्यात से जुड़े धन शोधन के एक मामले में गिरफ्तार किया है। आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी है।

सूत्रों ने बताया कि उत्तर कन्नड़ की कारवार विधानसभा सीट से 59 वर्षीय विधायक को संघीय जांच एजेंसी के बेंगलुरु क्षेत्रीय कार्यालय में पूछताछ के बाद मंगलवार देर रात हिरासत में ले लिया गया। मंगलवार को उन्हें एक विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की एक दिन की हिरासत में भेज दिया गया। सूत्रों ने बताया कि उसे बुधवार को फिर से अदालत में पेश किया जाएगा, जहां एजेंसी उनकी नई हिरासत की मांग करेगी।

बीते महीने भी एक विधायक की हुई थी गिरफ्तारी

पिछले महीने के अंत में एजेंसी ने चित्रदुर्ग के विधायक के सी वीरेंद्र ‘पप्पी’ को कथित अवैध सट्टेबाजी से जुड़े धन शोधन मामले में गिरफ्तार किया था।

कांग्रेस विधायक सतीश कृष्ण सेल के खिलाफ कैसे शुरू हुई जांच

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ईडी की जांच कर्नाटक लोकायुक्त द्वारा 2010 में दर्ज एक मामले से शुरू हुई, जिसमें बेल्लारी से बेलेकेरी बंदरगाह तक लगभग आठ लाख टन अवैध रूप से परिवहन किये गए लौह अयस्क का पता चला था।

ईडी ने इस मामले में 13-14 अगस्त को कारवार, गोवा, मुंबई और दिल्ली में तलाशी ली थी। ईडी के अनुसार, जिन संस्थाओं पर छापेमारी की गई उनमें आशापुरा माइनकेम, श्री लाल महल, स्वास्तिक स्टील्स (होसपेट), आईएलसी इंडस्ट्रीज, श्री लक्ष्मी वेंकटेश्वर मिनरल्स जैसी कंपनियां शामिल हैं।

एजेंसी ने एक बयान में कहा था कि सेल सहित इन सभी संस्थाओं को बेंगलुरु में सांसदों और विधायकों के लिए विशेष अदालत ने श्री मल्लिकार्जुन शिपिंग प्राइवेट लिमिटेड द्वारा अन्य लोगों के साथ मिलीभगत करके लौह अयस्क चूर्ण के “अवैध” निर्यात के लिए दोषी ठहराया था। मल्लिकार्जुन शिपिंग को सेल की एक कंपनी बताया गया है।

ईडी ने कहा कि विधायक और अन्य के खिलाफ उसकी जांच विशेष अदालत द्वारा जारी दोषसिद्धि आदेश पर आधारित है। हालांकि, कर्नाटक उच्च न्यायालय ने पिछले साल विधायक की सात साल की जेल की सजा को निलंबित करने का आदेश दिया था।

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