Film Review: जोश भरने वाली है ‘विजेता’ की कहानी, जानिए कैसी है फिल्म
‘विजेता’ रिलीज हो गई है। फिल्म की कहानी किस दिशा जाती हैं और सितारों का अभिनय कैसा है, ये जानने के लिए नीचे स्क्रोल करें।

Vijeta Movie Review: आसमान की बुलंदियों को उसी ने छुआ है, जिसके पांव जमीन से जुड़े रहे हैं। जिसने अपने पारिवारिक मूल्यों को कभी नहीं भुलाया, जिसने धैर्य और नैतिकता का दामन कभी नहीं छोड़ा और साथ ही सांस्कृतिक जड़ों को भी अपने अंदर सहेजे-समेटे रहा, उसी को दुनिया हमेशा याद रखती है और उसी की हमेशा मिसाल भी दी जाती है। कोलकाता के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे राजेश के. अग्रवाल ने बहुत कम उम्र में ही परिवार की आर्थिक मदद करने के मकसद से काम करना शुरू कर दिया था, लेकिन अपनी मेहनत, ईमानदारी, जज्बा और हौसले के दम पर आगे चलकर ऐसे महान अंतरराष्ट्रीय व्यवसायी बन गए, जो आज अंतरराष्ट्रीय पुनर्चक्रण ब्यूरो (बीआईआर) के बोर्ड सदस्य व राजदूत के रूप में वैश्विक स्थिरता नीतियों को प्रभावित करते हैं।
जीवन का संघर्ष दिखाती है कहानी
19 सितंबर, 2025 को रिलीज हुई फिल्म ‘विजेता : जीरो टू हीरो: ए रियल-लाइफ जर्नी’ राजेश के. अग्रवाल के वास्तविक जीवन पर ही आधारित है। ‘विजेता’ में मध्यमवर्गीय परिवार की कहानी दिखाई गई है। यह फिल्म चुनौतियों पर विजय पाकर सफलता पाने की एक अविश्वसनीय, लेकिन सच्ची कहानी पर आधारित एक सशक्त सिनेमाई सफर पर ले जाती है और दर्शकों को ‘जीरो से हीरो’ बनने के लिए प्रेरित करती है। फिल्म ‘विजेता’ धैर्य और विजय के मिश्रण से उपजे एक सशक्त संघर्ष की एक सच्ची गाथा की झलक दिखाती है। कुल मिलाकर कहें तो चर्चित गीतकार और लेखक संदीप नाथ द्वारा लिखी गई पटकथा इस फिल्म को व्यक्तिगत संघर्षों और जीवन से बड़े टकरावों को परदे पर जीवंत करती है।
रियल-लाइफ जर्नी
‘विजेता’ में मध्यमवर्गीय परिवार की कहानी दिखाई गई है। कहानी की शुरुआत एक साधारण परिवेश में कड़ी मेहनत करते एक युवक के दृश्यों से होती है, लेकिन उसके बाद इसकी कहानी विश्वासघात, प्रतिद्वंद्विता और अंडरवर्ल्ड की दुनिया से मिलने वाली धमकियों के बीच तेजी से आगे बढ़ती है, जो नायक के संघर्ष करने के जज्बे की तीव्रता को शिद्दत से दिखाती है। कहानी का चरम बिंदु उस सीन में नजर आता है, जहां मुख्य पात्र राजेश एक दहाड़ती भीड़ के सामने सीना ठोककर शान से खड़ा है। और, यहां यह कहने में हिचक नहीं कि यही सीन फिल्म की टैगलाइन- ‘जीरो टू हीरो: ए रियल-लाइफ जर्नी’ को सार्थक करता है। फिल्म इसी भावना को उजागर करती है कि कैसे एक कहानी संघर्ष से शुरू होकर विजय में बदलती है। इसी वजह से ‘विजेता’ को इस साल की सबसे प्रेरणादायक फिल्मों में से एक माना जा रहा है।
कहानी
कहानी के अनुसार कोलकाता का 17 वर्षीय राजेश, अपने पिता और बड़े भाई के साथ एक मध्यवर्गीय परिवार में रहता है। उसका परिवार मौसमी मफलर का व्यवसाय चलाता है। महत्वाकांक्षी और उद्यमी, राजेश बाजार में एक कमी को पहचानता है और बनियान निर्माण का व्यवसाय शुरू करता है, जो उसकी मेहनत और ईमानदारी के दम पर देखते ही देखते सफलता का कीर्तिमान गढ़ने लगता है। उसकी शादी मंजू नामक युवती से होती है। इधर, बनियान का कारोबार फल-फूल रहा है, उधर राजेश ने कंटेनर सप्लाई का कारोबार भी शुरू कर दिया, जो लाभदायक साबित हुआ। इसी दौरान राजेश और मंजू के चार बच्चे होते हैं, लेकिन जिंदा नहीं बचते हैं। वहीं राजेश की मां विजयलक्ष्मी का भी कैंसर से निधन हो जाता है।
इसके बाद राजेश के जीवन में व्यक्तिगत त्रासदियों का दौर शुरू हो जाता है। अपनी मां की अंतिम इच्छा के अनुसार राजेश एक बच्चे को गोद लेता है, जिससे उनके जीवन में आशा की किरण लौट आती है। लेकिन, जैसे ही जीवन स्थिरता की ओर कदम बढ़ाता है, परिवार को कानूनी परेशानियों के साथ अंडरवर्ल्ड से जबरन वसूली की धमकियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन, चुनौतियों के बीच, राजेश अपने परिवार की रक्षा और एक समृद्ध भविष्य सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ संकल्पित रहता है और अंतत: विजय हासिल करके ही दम लेता है।
अभिनय
इस फिल्म में राजेश की भूमिका में रवि भाटिया दमदार रोल में हैं। रवि भाटिया फिल्म में छाए हुए हैं या यूं कहिए कि पूरी फिल्म उन्हीं के मजबूत कंधों पर टिकी है। उनके किरदार में जीत-हार से लेकर संघर्ष, अवसाद, आशा-निराशा सबका मिश्रण है और सभी रूप में वह बेजोड़ साबित हुए हैं। उनके पिता की भूमिका में दिग्गज अभिनेता ज्ञान प्रकाश ने उनका अच्छा साथ दिया है। गोदान कुमार ने भी अपने किरदार में अलग रंग भरने का हरसंभव सफल प्रयास किया है। फिल्म में दीक्षा ठाकुर, प्रीटी अग्रवाल, नीरव पटेल जैसे अन्य कलाकार भी शामिल हैं, जो राजेश अग्रवाल के जीवन को आकार देते और रिश्तों को जीवंत करते हैं। इस फिल्म से अयोध्या की भारती अवस्थी बॉलीवुड में डेब्यू कर रही हैं और निश्चित ही उन्होंने अपनी पहली ही फिल्म से अभिनय की अमिट छाप छोड़ी है। नीरव पटेल भी अपनी भूमिका में जंचे हैं।
निर्देशन
फिल्म की पूरी शूटिंग भोपाल में हुई है। निर्देशक ने फिल्म के हर एंगल पर न केवल अपनी पैनी निगाह रखी है, बल्कि किस कलाकार से क्या और कैसा काम लेना है, यह भी बखूबी कर दिखाया है। फिल्म का छायांकन भी अद्भुत है। बीते हुए समय को दिखाने के लिए सेपिया टोन का इस्तेमाल, संघर्ष के लिए गहरे कंट्रास्ट का उपयोग और विजयोल्लास के लिए भव्य दृश्य का फिल्मांकन कहानी की वास्तविक नाटकीयता में गहरे रंग भरता है। कुल मिलाकर सामान्य से खास बनने की कहानी कहने वाली फिल्म ‘विजेता’ युवाओं को बेहद प्रभावित करने वाली है, क्योंकि यह केवल वित्तीय सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि लचीलेपन, नैतिकता और सभी बाधाओं से ऊपर उठने की इच्छाशक्ति की कहानी है।
क्यों देखें?
‘विजेता: जीरो टू हीरो’ एक सशक्त, संवेदनशील और प्रेरणादायक फिल्म है, जो संघर्ष, मूल्य, साहस और आत्म-विश्वास की मिसाल बनकर सामने आती है। यह सिर्फ एक बिजनेस आइकन की कहानी नहीं, बल्कि हर उस आम इंसान की जीत की कहानी है जो जीवन की कठिनाइयों से जूझता है, लेकिन हार नहीं मानता। रवि भाटिया का अभिनय फिल्म की आत्मा है, वहीं निर्देशक ने हर फ्रेम में भावना, वास्तविकता और सिनेमाई संतुलन को खूबसूरती से पिरोया है। पटकथा, संवाद और भावनात्मक दृश्य दर्शकों के दिल को छूते हैं। हम इसे 3 स्टार दे रहे हैं।




