मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के बढ़ते दुष्प्रभाव को लेकर गोष्ठी आयोजित

मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के बढ़ते दुष्प्रभाव को लेकर गोष्ठी आयोजित

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के वसंत विहार क्षेत्र में मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के बढ़ते दुष्प्रभाव को लेकर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में शिक्षाविदों एवँ बुद्धिजीवियों समेत कुछ स्कूली विद्यार्थियों ने अपने विचार प्रकट किए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रसिद्ध शिक्षाविद एवँ लक्ष्य यूनिवर्सल अकादमी की प्रधानाचार्या श्रीमती मिनी त्रिपाठी ने कहा कि आज के दौर में तेजी से बढ़ते हुए मोबाइल फोन के उपयोग ने हमें उस पर निर्भर रहना सीखा दिया है, जिसके परिणामस्वरूप हम आज मोबाइल फोन, कम्प्यूटर और टैब जैसे डिवाइस के आदि हो चुके हैं।

उन्होंने कहा कि इसका सबसे बुरा असर हमारे मासूम बच्चों पर पड़ रहा है, जो पढ़ने-लिखने व खेलने-कूदने के बजाय फोन पर नज़रें गड़ाए रहते हैं जो उनके स्वास्थ्य के साथ ही उनके भविष्य के लिए भी बेहद खतरनाक है। उन्होंने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखें।

बच्चे आजकल सोशल मीडिया के दीवाने हो चुके हैं और इंटरनेट पर घंटों तक अपना समय बर्बाद करते हैं जिससे वे पढ़ाई में पिछड़ते जा रहे हैं। वहीं माता-पिता भी अपने बच्चों को पूरा समय न दे पाने की वजह से उन्हें मोबाइल फोन थमा देते हैं जो बेहद हानिकारक साबित हो रहा है।

वहीं कार्यक्रम में अपनी बात रखते हुए डॉ. गुप्ता ने कहा कि मोबाइल फोन से निकलने वाला रेडिएशन बच्चों के लिए बेहद खतरनाक है। ये बच्चों के शारीरिक विकास में बाधक होने के साथ ही उनके मस्तिष्क पर भी बुरा प्रभाव डालता है जिससे उन्हें भयंकर बीमारी होने का खतरा बना रहता है। साथ ही उनकी याददाश्त भी कमजोर हो जाती है।

कार्यक्रम में बोलते हुए मिस्टर त्रिपाठी ने कहा कि आज के समय मे तकनीक का होना बेहद जरूरी है, तकनीक का उपयोग किये बिना हम बहुत पिछड़ जाएंगे किंतु इसका सही इस्तेमाल होना भी बेहद जरूरी है जिससे छोटे बच्चों या किसी पर भी इसका बुरा असर न पड़े।

वहीँ कुछ स्कूली बच्चों ने भी कार्यक्रम में सोशल मीडिया के दुष्परिणामों एवँ मोबाइल के दुरुपयोग पर अपने विचार प्रकट किये। साथ ही वक्ताओं ने सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेम्स के कारण जान गंवाने वाले बच्चों का उदाहरण भी प्रस्तुत किया।

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