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Movie Review: ‘बागी 4’ के साथ लौटे टाइगर श्रॉफ, जानिए कैसी है फिल्म

बागी 4 फिल्म रिव्यू: एक और बागी वापसी हो गई है, लेकिन इस बार भारी दिखावटीपन के साथ ये फिल्म लौटी है। इस फिल्म से खासी उम्मीदें थी, लेकिन इस बार भी निराशा ही हाथ लग रही है, जानें आखिर फिल्म देखने लायक है या नहीं।

Baaghi 4 Review: चार साल के लंबे अंतराल के बाद टाइगर श्रॉफ एक बार फिर ‘बागी’ फ्रैंचाइजी में रॉनी के किरदार में लौटे हैं। ‘बागी 4’ एक्शन, बदला और ड्रामा का ऐसा मिश्रण पेश करने की कोशिश करती है जो इस सीरीज को पहले से अधिक भव्य और हिंसक बनाने की चाहत रखती है। लेकिन क्या यह फिल्म वास्तव में अपनी पिछली कड़ियों से ऊपर उठ पाती है या सिर्फ वही पुराना फार्मूला दोहराती है, वो भी इस बार और ज्यादा शोर-शराबे के साथ? आज यानी 5 सितंबर को फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। फिल्म से हरनाज सांधु डेब्यू कर रही हैं और संजय दत्त भी हैं। फिल्म में पूरा मसाला डालने की कोशिश की गई है, ‘एनिमल’ जैसी दिखाने की तैयारी में कहीं सब धरा तो नहीं रह गया, जानें।

कैसे होती है कहानी की शुरुआत

‘बागी 4’ की कहानी एक बार फिर रॉनी (टाइगर श्रॉफ) के बदले की यात्रा के इर्द-गिर्द घूमती है। इस बार रॉनी को एक दुर्घटना का शिकार दिखाया गया है, जिससे वह ब्रेन डेड हो जाता है। लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, यह एक भ्रम और साजिश की ओर इशारा करती है। क्या यह एक्सीडेंट वाकई में एक हादसा था या किसी गहरी साजिश का हिस्सा? फिल्म की प्रेम कहानी रणवीर प्रताप सिंह (संजय दत्त) और डॉ अलीशा डिसूजा (हरनाज संधू) के साथ शुरू होती है, जो एक दुखद मोड़ लेती है। इसके बाद रॉनी की जिंदगी में उठापटक शुरू होती है। इस पूरे सफर में कई सपनों जैसे सीक्वेंस, मतिभ्रम, धीमी चाल में दौड़ते नायक और फिल्मी एक्शन शामिल हैं, जिनमें असल भावना और कहानी की कमी साफ झलकती है।

एक्शन और सिनेमैटोग्राफी

‘बागी 4’ का प्रमुख विक्रय बिंदु हमेशा से एक्शन रहा है और इस बार भी फिल्म उसी पर टिकने की कोशिश करती है। फिल्म में वीएफएक्स, स्लो-मोशन एक्शन, हड्डी तोड़ने वाले फाइट सीक्वेंस और खून-खराबे की भरमार है। लेकिन यह सब इतना अधिक दोहराव वाला और अवास्तविक लगता है कि दर्शक थक जाते हैं। कई दृश्यों में ऐसा लगता है जैसे निर्माता केवल तमाशे के नाम पर सीन रच रहे हैं, चाहे वो हेलिकॉप्टर से कूदता हुआ हीरो हो या वीएफएक्स से भरा समुद्री युद्ध, जिसमें टाइगर श्रॉफ एक नौसेना अधिकारी की भूमिका में नजर आते हैं, लेकिन सीन चाहे जितने भी भव्य हों, अगर कहानी में जान नहीं हो तो वह सब फिजूल का लगता है।

किरदार और अभिनय

मस्कुलर बॉडी, एक्शन मूव्स और सीमित डायलॉग्स के साथ टाइगर श्रॉफ अपने परिचित अंदाज में ही नजर आते हैं। इस फिल्म में उन्हें एक मानसिक रूप से भ्रमित व्यक्ति के रूप में दिखाने की कोशिश की गई है, लेकिन उनका अभिनय उस गहराई को छू नहीं पाता। संजय दत्त इस बार भी ट्रेंड के पीछे-पीछे चलते दिखते हैं। इससे पहले उन्होंने ‘पुलिसगिरी’ और ‘भूतनी’ जैसी फिल्मों में भी यही किया था, गलत समय पर गलत फिल्में चुनी थी। ‘बागी 4’ में वह चाको नामक किरदार निभाते हैं, जो न तो डरावना बन पाता है, न ही प्रभावशाली।

हरनाज संधू, जो फिल्म में डॉक्टर की भूमिका निभाती हैं, सबसे बेमेल कास्टिंग प्रतीत होती हैं। उनका किरदार न तो विश्वसनीय लगता है, न ही इमोशनल कनेक्ट बना पाता है। सोनम बाजवा और अन्य सह-कलाकार भी केवल कहानी को भरने के लिए मौजूद दिखते हैं।

संगीत और एडिटिंग

फिल्म का संगीत एक बड़ा कमजोर पक्ष है। गाने बेमतलब हैं और जब आते हैं तो लगता है कहानी की गति को रोक रहे हैं। बेसुरा संगीत, गलत समय पर डाले गए रोमांटिक ट्रैक और गानों का अचानक से गायब हो जाना फिल्म को और भी बिखरा हुआ बनाता है। एडिटिंग की बात करें तो फिल्म कई बार इतने अजीब ढंग से कटती है कि दर्शक भ्रमित हो जाते हैं कि कौन सा सीन कब और क्यों शुरू हुआ। एक्शन सीक्वेंस शुरू होने से पहले ही दर्शक उनका अनुमान लगा लेते हैं, जिससे रोमांच खत्म हो जाता है। वीएफएक्स और साउंड डबिंग की गुणवत्ता भी निराश करती है। कई जगहों पर संवाद और होंठों की हरकत मेल नहीं खाती, जिससे दर्शक के अनुभव में खलल पड़ता है।

संदर्भ और तुलना

फिल्म की तुलना ‘एनिमल’ और ‘किल’ जैसी फिल्मों से की जा सकती है, जहां हिंसा को कला की तरह प्रस्तुत करने की कोशिश की गई थी। लेकिन जहां उन फिल्मों में एक भावनात्मक या मनोवैज्ञानिक परत थी, ‘बागी 4’ में वह गहराई नहीं दिखती। यह केवल सतही रूप से हिंसा पर टिकी हुई है। कई जगहों पर फिल्म ‘द सिक्स्थ सेंस’, ‘जोकर’, ‘शटर आइलैंड’, और ‘लगे रहो मुन्ना भाई’ जैसे फिल्मों की झलक देने की कोशिश करती है, लेकिन उनमें से किसी के स्तर तक पहुंच नहीं पाती। यह न तो मनोरंजक है, न ही विचारोत्तेजक, बल्कि एक भटकती हुई कोशिश लगती है। फिल्म में हास्य के नाम पर सुदेश लहरी जैसे किरदारों को जोड़ा गया है, लेकिन वो भी फिल्म को हल्का करने में नाकाम रहते हैं।

क्या देखें या छोड़ें?

‘बागी 4’ उन फिल्मों की सूची में शामिल हो गई है जो पुराने फॉर्मूले को नए पैकेजिंग में पेश करने की कोशिश करती हैं, लेकिन दर्शकों की बदलती उम्मीदों को समझ नहीं पातीं। यह फिल्म दिखाती है कि सिर्फ हड्डियां तोड़ना, स्लो-मो एक्शन और वीएफएक्स का जोर दर्शकों को थियेटर तक नहीं खींच सकता। दर्शक अब एक बेहतर कहानी, दमदार पटकथा और वास्तविक इमोशंस की मांग करते हैं। हालांकि, टाइगर श्रॉफ के फैंस के लिए यह फिल्म थोड़ी राहत जरूर ला सकती है, खासकर उनकी पिछली असफल फिल्मों ‘गणपत’ और ‘बड़े मियां छोटे मियां’ के बाद। लेकिन मेजर दर्शकों के लिए यह फिल्म एक थकाऊ अनुभव बन जाती है।

  • फिल्म रिव्यू: बाघी 4
  • स्टार रेटिंग: 1.5/5
  • पर्दे पर: 05/09/2025
  • डायरेक्टर: ए हर्षा
  • शैली: एक्शन-थ्रिलर

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