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राज्य आन्दोलनकारी भावना पांडे ने हेलिकॉप्टर हादसे पर जताया दुख, उठाये कईं सवाल

समाजसेवी भावना पांडे ने कहा- केदारनाथ आपदा के 12 वर्ष बाद भी हालात नाजुक हैं। केदारघाटी को मिले पुराने जख्म अभी भरे नहीं हैं, उस पर समय-समय पर मिल रहे नये जख्म, दर्द को और गहरा कर रहे हैं। वहीं, केदारनाथ तक सुलभ और सरल पहुंच के दावे भी हवाई साबित हो रहे हैं।

देहरादून। उत्तराखंड में रुद्रप्रयाग के गौरीकुंड क्षेत्र में बड़ा हादसा हुआ है। रविवार को सुबह-सुबह केदारनाथ रूट पर श्री केदारनाथ धाम से गुप्तकाशी जा रहा एक हेलिकॉप्टर गौरीकुंड के पास पेड़ से टकराकर क्रैश हो गया। हेलिकॉप्टर में कुल सात लोग सवार थे। दर्दनाक हादसे में सातों लोगों की मौत हो गई, मृतकों में 23 महीने का बच्चा भी शामिल है।

उत्तराखंड की बेटी, राज्य आन्दोलनकारी एवं प्रसिद्ध समाजसेवी भावना पांडे ने इस भीषण हेलिकॉप्टर हादसे पर गहरा दुख प्रकट किया है। उन्होंने कहा- केदारनाथ में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में पायलट तथा श्रद्धालुओं की मृत्यु का समाचार अत्यंत दुःखद है। बाबा केदार दिवंगत आत्माओं को अपने श्री चरणों में स्थान दें एवं शोकाकुल परिजनों को यह पीड़ा सहन करने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति!

उत्तराखंड की बेटी भावना पांडे ने प्रदेश में हो रहे हेलिकॉप्टर हादसों को लेकर धामी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने इन हादसों के लिए प्रदेश सरकार को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया। भावना पांडे ने कहा कि राज्य सरकार की लापरवाही की वजह से ही उत्तराखंड में हेलिकॉप्टर दुर्घटनाओं में इजाफा हो रहा है। प्रदेश में सभी नियमों को ताक पर रखकर हेलीसेवा का संचालन किया जा रहा है, उसी के परिणाम स्वरूप ये हादसे हो रहे हैं। सरकार सोई नहीं है, बेशर्म हो चुकी है। चारधाम यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं की जिन्दगी अब भगवान भरोसे नहीं, सरकार की नाकामी की भेंट चढ़ रही है।

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राज्य आन्दोलनकारी भावना पांडे ने कहा- केदारनाथ घाटी में बीते 40 दिनों में 5 हेलीकॉप्टर हादसे हो चुके हैं, हादसों में मासूम श्रद्धालु अपनी जान गंवा रहे हैं। यह कोई संयोग नहीं, ये सीधा-सीधा सरकारी अपराध है। ना कोई प्रभावी एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम, ना मानकों के अनुरूप हेलीकॉप्टर संचालन, ना श्रद्धालुओं की सुरक्षा की गारंटी, ना ही मौसम की निगरानी व दिशा-निर्देश और ऊपर से शर्मनाक चुप्पी। सरकार श्रद्धालुओं के जीवन के साथ खुलेआम खिलवाड़ कर रही है। श्रद्धालु, जो दूर-दूर से चारधाम यात्रा पर आते हैं, उनके लिए यह यात्रा अब डर और मौत की यात्रा बनती जा रही है। वे अब यात्रा पर आने से घबरा रहे हैं।

समाजसेवी भावना पांडे ने कहा- केदारनाथ आपदा के 12 वर्ष बाद भी हालात नाजुक हैं। केदारघाटी को मिले पुराने जख्म अभी भरे नहीं हैं, उस पर समय-समय पर मिल रहे नये जख्म, दर्द को और गहरा कर रहे हैं। वहीं, केदारनाथ तक सुलभ और सरल पहुंच के दावे भी हवाई साबित हो रहे हैं। आपदा की बरसी से ठीक एक दिन पहले गौरीकुंड के गौरी माई खर्क में हुए हेलिकॉप्टर क्रैश ने आपदा के पुराने जख्म हरे कर दिये हैं। यही नहीं, बीते तीन वर्षों में देखें तो केदारनाथ यात्रा में हेलिकॉप्टर क्रैश होने की कईं घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें जिनमें निर्दोष यात्रियों को अपनी जान गंवानी पड़ी। इन घटनाओं के लिए भले ही मौसम को दोषी माना गया है, पर हकीकत यह है कि केदारनाथ तक सरल और सुलभ पहुंच के नाम पर जिस तरह से हेलिकॉप्टर की अंधाधुंध उड़ान हो रही हैं, यह उसी का नतीजा है। हेली कंपनियां मुनाफे की होड़ में पायलट और यात्रियों की जिदंगी से खेल रही हैं। वहीं, समूची केदारघाटी में आपदा के 12 वर्ष बाद भी सुरक्षा का इंतजाम तो दूर कार्ययोजना तक नहीं बन पाई है।

उत्तराखंड की बेटी भावना पांडे ने कहा- चारधाम यात्रा कोई प्रयोगशाला नहीं है। यह करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है लेकिन यहां कोई सुरक्षा नहीं, सिस्टम नहीं, संवेदना नहीं! हर हादसे के बाद सिर्फ एक “जांच समिति” और दो दिन की सुर्खियाँ, परिणाम वही ढाक के तीन पात। सवाल ये है कि और कितने बेकसूर लोगों की मौत के बाद जागेगी ये सरकार? क्या श्रद्धालुओं की जान की कोई कीमत नहीं है? क्या सरकार सिर्फ़ रेवेन्यू और दिखावे में ही व्यस्त रहेगी? उत्तराखंड की जनता अब चुप बैठने वाली नहीं है। हम सवाल पूछते रहेंगे, जब तक जवाब नहीं मिल जाता।

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