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दूषित पानी की सप्लाई से नैनीताल में 2 लोगों की मौत, सरकार ने उठाया ये कदम

नैनीताल में दूषित पानी पीने से कई लोग बीमार हो गए और दो लोगों की मौत हो गई। मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में छह इंजीनियरों को निलंबित कर दिया गया है।

नैनीताल। उत्तराखंड के नैनीताल जिले के ज्योलिकोट क्षेत्र में दूषित पेयजल की वजह से बीमारी फैलने और दो लोगों की मौत के मामले में छह इंजीनियरों को निलंबित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर जिला प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई। अधिकारियों पर सरकारी दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरतने का आरोप है। कुछ महीने पहले मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत हो गई थी।

निलंबित अधिकारियों में जल संस्थान के हल्द्वानी स्थित प्रभारी अधीक्षण अभियंता, नैनीताल जल संस्थान के सहायक अभियंता, अपर सहायक अभियंता और पेयजल निगम के भीमताल के अधिशासी अभियंता, प्रभारी सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता शामिल हैं। नैनीताल जल संस्थान के अधिशासी अभियंता को भी चेतावनी दी गई है। सरकार ने कहा है कि भविष्य में किसी तरह की लापरवाही सामने आने पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

दूषित पानी से कई गांव प्रभावित

ज्योलिकोट और आस-पास के गांवों में दूषित पेयजल की आपूर्ति के बाद बड़ी संख्या में लोग बीमार हुए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में बेलुवाखान, ज्योलिकोट, गेठिया, सड़ियाताल, दुर्गापुर, गंजा, वीरभट्टी और छीना शामिल हैं। कई लोगों में पीलिया के मामले सामने आए हैं।

इस घटनाक्रम में 16 वर्षीय छात्र और 26 वर्षीय महिला की मौत के बाद क्षेत्र में चिंता बढ़ गई थी। प्रशासन ने प्रभावित गांवों में राहत और स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ाईं। मेडिकल टीमों को घर-घर भेजकर क्लोरीन की गोलियां और ओआरएस वितरित किए गए। आठ डॉक्टरों और एक एंबुलेंस को भी प्रभावित क्षेत्र में तैनात किया गया।

हाई कोर्ट ने स्थिति को बताया था ‘महामारी’

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मामले में उत्तराखंड हाई कोर्ट ने भी संज्ञान लिया था। 8 सितंबर को अदालत ने ज्योलिकोट और आस-पास के गांवों में स्वच्छ पेयजल और पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। अदालत ने स्थिति को ‘महामारी’ बताते हुए नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल को राहत कार्यों की व्यक्तिगत निगरानी करने का निर्देश दिया था।

जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान नैनीताल की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रश्मि पंत ने अदालत को बताया था कि बीमारियों के पीछे दूषित पानी कारण था। हाई कोर्ट ने पेयजल की जांच केवल विभागीय स्तर पर कराने के बजाय निजी प्रयोगशालाओं से भी कराने के निर्देश दिए थे।

सीवर और पेयजल लाइनों की जांच के निर्देश

हाई कोर्ट ने जल संस्थान और पेयजल निगम को यह सुनिश्चित करने को कहा कि सीवर और पेयजल की पाइपलाइन आपस में न मिलें। इसके अलावा नैनीताल शहर में पानी के दूषित होने और सीवर लीकेज की जांच करने एवं 20 से 25 स्थानों से पानी के नमूने लेने के निर्देश दिए गए।

अदालत ने यह भी कहा कि यदि स्थानीय स्तर पर पर्याप्त विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं तो बाहर से विशेषज्ञ चिकित्सकों को बुलाया जाए। इसके साथ ही कुमाऊं क्षेत्र में जल परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित करने के प्रस्ताव पर संबंधित सचिव को जल्द निर्णय लेने को कहा गया।

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