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भाजपा नेत्री बेबी रानी मौर्य होंगी उत्तराखंड की नई राज्यपाल

देहरादून। भाजपा की पुरानी नेत्री बेबी रानी मौर्य उत्तराखंड की नई राज्यपाल होंगी। बेबी रानी मौर्या को बड़े ओहदे से नवाजा गया है। उन्हें उत्तराखंड का राज्यपाल बनाया गया है। वे उत्तर प्रदेश में कद्दावर नेता हैं। मारग्रेट आल्वा के बाद यह दूसरी महिला हैं जो उत्तराखंड की राज्यपाल बनी हैं।

बेबी रानी मौर्य आगरा के बालूगंज में रहती हैं। वे आगरा की मेयर रह चुकी हैं। पूर्व में राज्य महिला आयोग की सदस्य भी रह चुकी हैं। वर्तमान में यूपी बाल आयोग की सदस्य हैं। उन्हें बड़े पद मिलने की चर्चा जोरों पर थी। बेबी रानी मौर्य एमए, बीएड हैं। फिलहाल वे अमेरिका गई हुई हैं। उनके राज्यपाल बनने की सूचना के बाद घर व आसपास खुशी का माहौल है।

मंगलवार की शाम केंद्र सरकार ने कई राज्यों में नए राज्यपालों की नियुक्ति की है। जिसमें उत्तराखंड भी शामिल है। इससे पहले डॉ. केके पॉल उत्तराखंड के राज्यपाल थे। जिनका कार्यकाल 8 जुलाई माह में समाप्त हो गया था। लाल जी टंडन को बिहार, गंगा प्रसाद को सिक्किम, सतपाल मलिक को जम्मू-कश्मीर, सत्यदेव नारायण आर्य को हरियाणा, तथागत रॉय को मेघालय, कप्तान सिंह सोलंकी को त्रिपुरा का राज्यपाल बनाया गया है।

भारतीय जनता पार्टी की एक आम कार्यकर्ता से लेकर उत्तराखंड का राज्यपाल बनने तक के सफर में बेबी रानी मौर्य तमाम उतार चढ़ाव देखे हैं। पहले चुनाव में मेयर के पद तक पहुंची तो बाद में विधायक का चुनाव हार गईं लेकिन पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा ने आज उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है। बेबीरानी मौर्य के ससुर एमडी मौर्य आईपीएस अधिकारी थे। पति प्रदीप कुमार मौर्य बैंक के अधिकारी रहे। परिवार में राजनीतिक माहौल नहीं था।

सास कमला मौर्य बताती हैं कि बेबीरानी मौर्य ने डरते-डरते राजनीति में आने के लिए इजाजत मांगी थी। ससुर ने इजाजत दी तो भाजपा ज्वाइन कर ली। पार्टी में आने के कुछ ही दिनों बाद 1995 में उन्होंने मेयर जैसा अहम चुनाव लड़ाया। जनता ने उनका साथ दिया और वे मेयर चुनी गईं। 2000 तक वे आगरा की मेयर रहीं। वह शहर की पहली महिला मेयर थीं।

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1997 में वे राष्ट्रीय अनुसूचित मोर्चा की कोषाध्यक्ष रहीं। वर्तमान में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद तब राष्ट्रीय अनुसूचित मोर्चा के अध्यक्ष रहे। 2001 में उन्हें प्रदेश सामाजिक कल्याण बोर्ड सदस्य बनाया गया। 2002 में राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य बनीं। इसके बाद पार्टी ने 2007 में एत्मादपुर विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया लेकिन बसपा उम्मीदवार नारायण सिंह सुमन ने उन्हें नजदीकी अंतर से हरा दिया।

2013 से 2015 तक संगठन में उन्होंने प्रदेश मंत्री का दायित्व संभाला। वर्तमान में बेबीरानी मौर्य राष्ट्रीय परिषद एवं प्रदेश कार्य समिति की सदस्य हैं। बेबीरानी मौर्य पार्टी का शालीन चेहरा है। पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा का उन्हें प्रतिफल मिला है। इसके साथ ही आलाकमान ने पार्टी का दलित चेहरा और महिला होने के नाते ही उन्हें दायित्व सौंपा है।

एक नजर…
– सामाजिक कार्यों के लिए 1996 में समाज रत्न से सम्मानित किया गया
– 1997 में उत्तर प्रदेश समाज रत्न सम्मानित किया गया
– 1998 में नारी रत्न से सम्मानित किया गया
– 18 वर्ष से नव चेनता जागृति संस्था के माध्यम से दलित एवं पिछड़ी महिला के लिए कार्य किया
– बच्चियों को शिक्षा के प्रति जागरूक करना और सेवा भारती के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम

राज्यपाल की भूमिका में डॉ. केके पॉल का पांच साल का कार्यकाल आठ जुलाई को पूरा हो चुका है। मेघालय के राज्यपाल के तौर पर उनकी नियुक्ति के आदेश एक जुलाई, 2013 को हुए थे।

पिछले करीब पांच साल के दौरान वे पहले नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम के राज्यपाल रहे और फिर उन्हें उत्तराखंड की जिम्मेदारी सौंपी गई । उन्होंने जनवरी, 2015 को उत्तराखंड के छठे राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी। उत्तराखंड के राज्यपाल के तौर पर उन्होंने तीन साल पांच महीने का कार्यकाल पूरा किया।

राज्यपाल डॉ. केके पॉल से पहले डॉ. अजीज कुरैशी, मारग्रेट आल्वा, बीएल जोशी, सुदर्शन अग्रवाल और सुरजीत सिंह बरनाला उत्तराखंड के राज्यपाल रहे हैं।

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