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PM Modi ने लाल किले से पाकिस्तान को दिया कड़ा संदेश, कही ये बडी बात

लाल किले की प्राचीर से पीएम मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर के वीर सैनिकों को नमन किया। साथ ही पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया। पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने सेना को खुली छूट दी है।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से पाकिस्तान और आतंकियों को कड़ा संदेश दिया। पीएम मोदी ने कहा कि आतंकियों और उसे शह देने वालों को अब भारत अलग-अलग नहीं देखेगा। ब्लेकमेल नहीं सहा जाएगा। हम पाकिस्तान की न्यूक्लियर धमकी को नहीं सहेंगे। दुश्मन को अब कड़ा जवाब दिया जाएगा। खून और पानी एक साथ नहीं बहेंगे। देशवासियों को भली भांति पता चला है कि सिंधु समझौता कितना गलत था।

पीएम मोदी ने पाकिस्तान को दी चेतावनी

पीएम मोदी ने कहा कि पाकिस्तान की नींद अभी भी उड़ी हुई है। पाकिस्तान में हुई तबाही इतनी बड़ी है कि रोज नए-नए खुलासे हो रहे हैं, नई-नई जानकारियां आ रही हैं। आगे भी अगर दुश्मनों ने ये कोशिश जारी रखी, तो हमारी सेना तय करेगी, सेना की शर्तों पर, सेना द्वारा निर्धारित समय पर, सेना द्वारा तय लक्ष्य को अब हम अमल में लाकर रहेंगे। अब मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमने अपने सशस्त्र बलों को पूरी छूट दी, उन्हें रणनीति बनाने, लक्ष्य निर्धारित करने और समय तय करने की अनुमति दी। हमारे सुरक्षा बलों ने कई दशकों से न देखी गई एक मिसाल कायम की। उन्होंने दुश्मन के इलाके में सैकड़ों किलोमीटर अंदर तक घुसकर हमला किया और आतंकवादी ठिकानों को धूल में मिला दिया।

न्यूक्लियर ब्लैकमेल अब नहीं सहेगा

देश को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हमारा देश कई दशकों से आतंक को झेलता आया है। अब आतंक और आतंकी को पालने पोसने वालों को अब हम अलग – अलग नहीं मानेंगे। अब भारत ने तय कर लिया है कि न्यूक्लियर की धमकियों को अब हम सहने वाले नहीं है। न्यूक्लियर ब्लैकमेल लंबे अरसे से चला आया है। अब वो ब्लैकमेल नहीं सहा जाएगा। आगे भी दुश्मनों ने कोशिश जारी रखी हमारी सेना तय करेगी। सेना की शर्तों पर समय निर्धारित करे.. जो लक्ष्य तय करे। अब हम अमल में लाकर रहेंगे। मुहतोड़ जवाब देंगे.. भारत ने तय कर लिया है खून और पानी एक साथ नहीं बहेगा।

सिंधु नदी समझौता हमें मंजूर नहींः मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पाकिस्तान के साथ हुआ सिंधु नदी का समझौता अन्यायपूर्ण है…यह एकतरफा है। भारत से निकलता पानी दुश्मनों के खेत को सींच रहा है और मेरे देश का किसान, मेरे देश की धरती पानी के बिना प्यासी है। ये ऐसा समझौता था जिसने पिछले सात दशक से किसानों का अकल्पनीय नुकसान किया है। अब हिंदुस्तान के हक का जो पानी है.. इस अधिकार हिंदुस्तान का है.. हिंदुस्तान के किसानों का है.. किसान हित में राष्ट्र हित में ये समझौता हमें मंजूर नहीं है।

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