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प्रदूषण के खिलाफ दीया मिर्जा का वीडियो फिर से अपलोड करने का बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिया आदेश

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीएमसी को निर्देश दिया है कि वह प्रदूषण के खिलाफ बनाए गए दीया मिर्जा के वीडियो को सोशल मीडिया पर फिर से अपलोड करे। बॉम्बे हाईकोर्ट ने ये भी याद दिलाया है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है।

मुंबई। मुंबई में प्रदूषण के खिलाफ BMC के अभियान में दीया मिर्जा को शामिल करने पर विवाद हो गया था। भाजपा के कई नेताओं ने इस कदम पर नाराजगी जताई थी। BMC ने दीया मिर्जा का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया था, जिसमें वह बॉम्बे हाईकोर्ट के पटाखों के इस्तेमाल संबंधी निर्देशों का पालन करने की अपील कर रही थीं। विवाद बढ़ने के बाद बीएमसी दीया मिर्जा का पोस्ट (वीडियो) हटा दिया था। इसके साथ ही बीएमसी मेयर ने दीया मिर्जा को बीएमसी से ब्लैक लिस्ट भी कर दिया था। हालांकि, अब बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर बीजेपी नेताओं को फटकार लगाई है और दीया मिर्जा के वीडियो पर की गई टिप्पणियों पर नाराजगी जताई है। हाईकोर्ट ने BMC को दीया मिर्जा के वीडियो को फिर से अपलोड करने का आदेश दिया है।

क्या है पूरा विवाद?

बॉलीवुड अभिनेत्री दीया मिर्जा ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक, सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे नहीं फोड़ने की अपील करते हुए एक वीडियो बनाया था। BMC ने इस मुद्दे पर लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए दीया मिर्जा को इस अभियान से जोड़ा था। हालांकि, बीजेपी नेताओं की ओर से वीडियो का विरोध किए जाने के बाद BMC ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से वीडियो हटा दिया था।

भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश- हाईकोर्ट

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इस मामले पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की बेंच ने कुछ नेताओं की टिप्पणियों पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि कुछ राजनेताओं की ओर से की गई इस तरह की टिप्पणियों से वे आहत हैं। साथ ही उन्होंने ये भी याद दिलाया कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है। हाईकोर्ट ने BMC को हटाए गए वीडियो को दोबारा सोशल मीडिया पर अपलोड करने का आदेश दिया है।

वायु प्रदूषण पर कोर्ट ने क्या कहा था?

आपको बता दें कि त्योहारों के दौरान ध्वनि और वायु प्रदूषण के मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लेकर दायर जनहित याचिका (Suo Motu PIL) पर सुनवाई करते हुए जस्टिस जी.एस. कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की खंडपीठ ने पहले निर्देश दिया था कि सेलिब्रिटी के प्रचार पर सरकारी खजाने से पैसा खर्च नहीं किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा था कि जानी-मानी हस्तियों को स्वेच्छा से नागरिक जागरूकता अभियान में योगदान देना चाहिए। कोर्ट के निर्देश के बाद BMC ने सशुल्क ब्रांड एंबेसडर नियुक्त करने के बजाय स्वयंसेवकों की मदद लेने का फैसला किया। इसके तहत BMC ने कई जानी-मानी हस्तियों से संपर्क किया, जो बिना कोई फीस लिए (प्रो बोनो) जागरूकता संदेश रिकॉर्ड करने के लिए तैयार हुईं थी।

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