Breaking NewsUttarakhand

विश्व पर्यावरण दिवस पर संयुक्त नागरिक संगठन द्वारा आयोजित किया गया संवाद कार्यक्रम

जागरूक नागरिकों का सुझाव था कि सड़कों और बाजारों सहित सभी सार्वजनिक कार्यालयो के आस पास छोटे-छोटे गड्ढे बनाकर उनमें पौधे लगाए जाएं जो शहर की हरियाली और जलसंचय का भी संवर्द्धन कर सके। इन प्रयासों को युद्ध स्तर पर धरातल पर उतारना जनहित में जरूरी होगा।

देहरादून। उत्तराखंड में पिछले पांच वर्षों में सरकारी विभागों द्वारा राज्य में कई करोड़ पेड़ पौधे रोपित किए गए जिनमें दून क्षेत्र में लाखों की संख्या में लगाए गए पेड़ भी शामिल थे। संरक्षण के अभाव में अधिकांश परलोक सुधार गए, जिंदा बचे पेड़ों की संख्या बहुत कम है। करोड़ों रुपए बहाने के बाद भी कंक्रीट के शहर में तब्दील होते दून में हरियाली ख्वाब बनती जा रही है। शत-प्रतिशत पौधारोपण अभियान की सफलता इसके संरक्षण पर निर्भर होती है। हरेला पर्व को इवेंट न बनाकर इसको धरातल पर उतारना होगा। ये विचार विश्व पर्यावरण दिवस पर संयुक्त नागरिक संगठन द्वारा नेमी रोड पर आयोजित संवाद जिसका विषय “पर्यावरण बनाम प्रदूषण दून वासियों की चिंताएं तथा सुझाव” था, में पर्यावरण प्रेमियों के थे।

वक्ताओं ने कहा है की सड़कों पर बढ़ते वाहनों की संख्या से निकलने वाली हानिकारक गैसे, बढ़ती आबादी तथा संसाधनों की कमी से कचरा प्रबंधन की नाकामयाबी, नदियों में डंप होते कूड़ा करकट की आदतों ने आमजन के स्वास्थ्य को गंभीर आघात पहुंचाया है। इसमें मिलावटी खान पान भी शामिल है।इसके लिए नगरनिगम तथा संबंधित विभागों को तत्काल कदम उठाने होंगे।

जागरूक नागरिकों का सुझाव था कि सड़कों और बाजारों सहित सभी सार्वजनिक कार्यालयो के आस पास छोटे-छोटे गड्ढे बनाकर उनमें पौधे लगाए जाएं जो शहर की हरियाली और जलसंचय का भी संवर्द्धन कर सके। इन प्रयासों को युद्ध स्तर पर धरातल पर उतारना जनहित में जरूरी होगा। वक्ताओं की यह भी सुझाव था की सिंगल यूज प्लास्टिक की निर्माता/विक्रेता कंपनियों को भी हमेशा के लिए बंद कर दिया जाए जिससे यह उपभोक्ताओं तक पहुंच ही न सके। तभी शहर की सफाई व्यवस्था को कुछ हद तक काबू में लाया जा सकेगा।

सुझाव यह भी था कि शहर में डीजल, पेट्रोल से चलने वाले टेंपो, थ्री व्हीलर, सिटी बसों की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों को ही बढ़ावा दिया जाए जिससे वायु और ध्वनि प्रदूषण कम हो सकेगा। सुझाव था कि दून कि वर्तमान सड़कों पर बढ़ते वाहनों को दबाव कम करने के लिए पूरे शहर के अंदर चारों ओर एलिवेटेड रोड बनाए जाएं, शहर को जाम से मुक्ति दिलाने का यही एकमात्र विकल्प है। टुकड़ों में बने एलिवेटेड रोड समस्या का स्थाई समाधान नहीं है।आज नहीं तो कल जिम्मेदार संत्री मंत्रियों को ये बात समझ में आ ही जाएगी।

सुझाव यह भी था कि शहरी विकास विभाग को स्पष्ट नीति अपनाकर राज्य में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, हाईराइज बिल्डिंग्स के निर्माण हेतु दी जाने वाली अनुमति में उनके परिसरों में वृक्षारोपण अनिवार्य बनाकर इनका क्रियान्वयन कराया जाना पर्यावरणीय हित में जरूरी है क्योंकि इनके द्वारा परिसरों को कांक्रीट से ढक दिया गया है। दून वासियों का सुझाव था की जलसंचय अभियान को भी सफल बनाना जरूरी है जो अभी कागजों में ही है। इसके लिए शहर में सभी जगह छोटे-छोटे पिट बनाए जाए जिससे वर्षा जल का संचय हो अन्यथा भूजल स्तर गिरता जाएगाऔर पीने का पानी भी नसीब होना मुश्किल होगा। शहर के अनियंत्रित फैलाव को रोकने हेतु ग्रेटर दून की स्थापना का भी सुझाव सामने आया। संवाद में रायपुर क्रिकेट स्टेडियम के सामने स्थित सूखे पेड़ों के कब्रिस्तान के पास पौधारोपण करने का भी निर्णय लिया गया।

संवाद में शामिल नरेशचंद्र कुलाश्री, राजीव खनसाली, मोहन सिंह खत्री, डॉ राकेश डंगवाल, लै. कर्नल बीएम थापा, ब्रि.केजी बहल, एम एस रावत, मुकेश नारायण शर्मा, सुशील त्यागी, डा.दिनेश सक्सेना, दिनेश भंडारी, उमेश्वर सिंह रावत, एस एस गोसाई, रणजीत सिंह कैंथुरा, अवधेश शर्मा, राजेंद्र सिंह रावत, आदि शामिल थे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button