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पर्यावरणविद सुन्दरलाल बहुगुणा की पुण्यतिथि पर पार्षद वंशिका सोनकर ने किया नमन

जनसेवी वंशिका सोनकर ने कहा- उत्तराखंड राज्य के लिए सुंदर लाल बहुगुणा जी के द्वारा किये गए योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। जल, जंगल व जमीन बचाने और मानवता के हित में उनका संघर्ष अनुकरणीय है।

देहरादून। युवा भाजपा नेत्री, प्रसिद्ध समाजसेवी एवं वार्ड संख्या 18 इंदिरा कॉलोनी की नगर निगम पार्षद वंशिका सोनकर ने प्रसिद्ध पर्यावरणविद और ‘चिपको आन्दोलन’ के प्रमुख नेता स्वर्गीय सुन्दरलाल बहुगुणा की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए सादर नमन किया।

स्वर्गीय सुंदरलाल बहुगुणा की पुण्यतिथि पर उनको श्रद्धांजलि देते हुए एवँ उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए पार्षद वंशिका सोनकर ने कहा कि सुंदरलाल बहुगुणा जी की महानता का जितना भी गुणगाण किया जाए कम ही है। उन्होंने कहा कि स्व. सुन्दरलाल बहुगुणा प्रसिद्ध पर्यावरणविद और ‘चिपको आन्दोलन’ के प्रमुख नेता थे। चिपको आन्दोलन के कारण वे विश्वभर में वृक्षमित्र के नाम से प्रसिद्ध हो गए। उन्हें 1984 के राष्ट्रीय एकता पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

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पार्षद वंशिका सोनकर ने कहा कि सुन्दरलाल बहुगुणा का जन्म 9 जनवरी, 1927 को उत्तराखंड के सिलयारा नामक स्थान पर हुआ था। उन्होंने सिलयारा में ही ‘पर्वतीय नवजीवन मण्डल’ की स्थापना भी की। 1949 में मीराबेन व ठक्कर बाप्पा के सम्पर्क में आने के बाद सुन्दरलाल बहुगुणा दलित वर्ग के विद्यार्थियों के उत्थान के लिए प्रयासरत हो गए और उनके लिए टिहरी में ठक्कर बाप्पा होस्टल की स्थापना भी की। दलितों को मंदिर प्रवेश का अधिकार दिलाने के लिए उन्होंने आन्दोलन छेड़ा। 1971 में सुन्दरलाल बहुगुणा ने सोलह दिन तक अनशन भी किया था।

जनसेवी वंशिका सोनकर ने कहा कि बहुगुणा जी के कार्यों से प्रभावित होकर अमेरिका की फ्रेंड ऑफ नेचर नामक संस्था ने 1980 में इनको पुरस्कृत किया। इसके अलावा उन्हें कई बार पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। पर्यावरण को स्थाई सम्पति मानने वाले ये महापुरुष ‘पर्यावरण गाँधी‘ बन गए। अन्तर्राष्ट्रीय मान्यता के रूप में 1981 में स्टाकहोम का वैकल्पिक नोबेल पुरस्कार मिला। सुन्दरलाल बहुगुणा जी को 1981 में पद्मश्री पुरस्कार भी दिया गया, जिसे उन्होंने यह कह कर स्वीकार नहीं किया कि “जब तक पेड़ों की कटाई जारी है, मैं स्वयं को इस सम्मान के योग्य नहीं समझता हूँ।”

ऐसे कईं बड़े पुरस्कार उनके नाम पर दर्ज हैं। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन देवभूमि उत्तराखंड की सेवा और पेड़ों की रक्षा के लिए व्यतीत कर दिया। उत्तराखंड राज्य के लिए उनके द्वारा किये गए योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। जल, जंगल व जमीन बचाने और मानवता के हित में उनका संघर्ष अनुकरणीय है। स्व. सुंदरलाल बहुगुणा जी की पुण्यतिथि पर उन्हें शत्-शत् नमन।

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