विश्व शांति दिवस पर ‘भारत के देशभक्त’ सम्मान से नवाजे गए दून के समाज सेवी
कार्यक्रम में सरदार जी एस जस्सल, अमर सिंह धुनता, तारा चंद गुप्ता, पर्यावरण प्रेमी वीरेंद्र पैन्यूली को भारत के देशभक्त सम्मान से नवाजा गया। कार्यक्रम का संचालन सुशील त्यागी ने किया।

देहरादून। दुर्लभ खनिजों और प्रौद्योगिकी को हथियार न बनाए जाय” प्रधानमंत्री मोदी तथा “जिसकी लाठी उसी की भैंस” वाली सोच को छोड़ने के चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग का आह्वान ब्रिक्स देशों में एक नई सकारात्मक प्रशंसनीय सोच का जन्म है जो भारत की गुटनिरपेक्ष नीति का प्रतिबिंब है। ये विचार आज अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस पर संयुक्त नागरिक संगठन द्वारा ब्रिक्स सम्मेलन तथा विश्व शांति की चुनौतियां विषय पर रेस कोर्स में आयोजित संवाद में वक्ताओं ने कहे।

संवाद में रूस यूक्रेन शांति वार्ता में भारत और चीन की मदद को भी विश्व शांति की दिशा में सकारात्मक कदम बताया गया।वक्ताओं का कहना था कि दुनिया में आज शांति प्रयासों को मजबूत बनाते हुए युद्धोन्माद की जगह भूख, गरीबी, अशिक्षा, मंहगाई, बेरोजगारी, बीमारी और पर्यावरण दुष्प्रभावों से मानवता को बचाए जाने की जरूरत है। ब्रिक्स के प्रयास इस दिशा में भी सार्थकता सिद्ध करेंगे, आशा है।

एक वक्ता का कहना था कि ब्रिक्स देशों के सामने वैश्विक शक्ति संतुलन की भी चुनौती है।विश्व व्यापार में 80 साल से डॉलर मुद्रा की दादागिरी, भारत, रूस, चीन, साउथ अफ्रीका आदि अपनी साझा मुद्राओं में व्यापार करके दे सकेंगे ब्रिक्स से ये भी एक संदेश दिया गया है। इस अवसर पर बताया गया कि भारत रूस मित्रता न केवल देश की सैन्य क्षमताओं, आर्थिक सहयोग और ऊर्जा के लिए जरूरी है बल्कि विश्व शांति पर बढ़ते खतरों से निपटने के साथ अमेरिका की भारत विरोधी टैरिफ नीति का भी जवाब देने में कारगर सिद्ध होगी और आतंकवाद के पोषक पाकिस्तान, तुर्की, सऊदी अरब के नए इस्लामी नाटो गठबंधन से पैदा खतरों का सामना भी कर सकेगी।

कार्यक्रम के अंत में सरदार जी एस जस्सल, अमर सिंह धुनता, तारा चंद गुप्ता, पर्यावरण प्रेमी वीरेंद्र पैन्यूली को भारत के देशभक्त सम्मान से नवाजा गया। कार्यक्रम का संचालन सुशील त्यागी ने किया।

इस अवसर पर अवधेश शर्मा, डॉ एस फारूक, डा.दिनेश सक्सेना, दिनेश भंडारी, मेजर महावीर सिंह रावत, जितेंद्र डंडोना, महावीर सिंह बिष्ट, पद्मेंद्र बर्त्वाल, प्रकाश नागीया, निलेश राठी, नवीन सदाना, शेयरिंग लुडिंग, गिरीश चंद्र भट्ट, ठाकुर शेर सिंह थापली, खुशबीर सिंह, एस एस गोसाई, उमेश सक्सेना, डा.स्वामी एस चंद्रा, मोहन सिंह खत्री, आशीष वर्मा, डॉ शैलेंद्र एसपी दुबे, परमजीत, प्रोफेसर आईपी पांडेय, डा.टी एन जौहर, विनोद नौटियाल, मैड से आशीष तथा आरची बिष्ट आदि शामिल हुए।




