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विश्व पृथ्वी दिवस एवं नमक तोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ पर कार्यक्रम आयोजित

कार्यक्रम का समापन खाराखेत नून नदी से भरकर लाए जल कलश को गांधी पार्क स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा पर लाकर अर्पित किया गया।

देहरादून। विश्व पृथ्वी दिवस तथा गांधी जी के नमक तोड़ो आंदोलन की 96वीं वर्षगांठ पर खाराखेत में नून नदी पर स्थित स्मारक पर दून के सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने जहां आजादी के योद्धाओं को पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धासुमन अर्पित किए वहां पर्यावरण संरक्षण के लिए संकल्प भी लिया।

कार्यक्रम का आयोजन मैती आंदोलन, संयुक्त नागरिक संगठन, महावीर सेवा समिति, पहाड़ी पैडलर ग्रुप द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था। यहां रेंज अधिकारी सुनेल पनेरु सहित वन विभाग की टीम के साथ पर्यावरण प्रेमियों तथा युवा पैडलर्स ने पौधारोपण में भाग लिया।

यहां आयोजित संवाद में वक्ताओं ने कहा जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान, प्लास्टिक प्रदूषण के खतरों का सामना करने के लिए आज प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति सभी नागरिकों को जागरूक किया जाना जरूरी है। हमे घरों में या घर से बाहर प्लास्टिक या पॉलीथीन के बैग का प्रयोग बिल्कुल खत्म करना होगा, इसके रीसायकल और रीयूज को भी अपनाना होगा।

कुछ वक्ताओं ने एयर कंडीशनर का कम से कम प्रयोग करने का भी आह्वान किया और बताया इससे कंक्रीट के बढ़ते जंगलों में वातावरण अधिक गर्म और प्रदूषित हो रहा है।कुछ लोगों की सुविधा के लिए आमजन के स्वास्थ्य को खतरा पहुंचना अन्याय है, अब दून में नई ऊंची हाई राइज बिल्डिंग्स की जगह ऊंचे वृक्षों की जरूरत है तभी विनाश से बच जा सकता है।

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वक्ताओं ने रायपुर स्टेडियम के बाहरी क्षेत्र में सूखे तथा कटे पेड़ों के श्मशान की जगह नया जंगल उगाने की मांग सरकार से की। वक्ताओं का विचार था कि पेड़ पौधे लगाना भी जरूरी है लेकिन इनके पनपने की पूर्ण जिम्मेदारी भी ली जानी जरूरी है, सरकारी पौधारोपण में लाखों पेड़ लगाए गए हैं परंतु सरकारी आंकड़ों के अनुसार ही केवल एक तिहाई बच पाए हैं जो लापरवाही का नमूना है।

वृद्ध नागरिकों का कहना था की मानव वन्यजीव संघर्ष के बुनियादी कारणों पर विचार कर वन्य जीव जंतुओं,पशु पक्षियों के प्राकृतिक आवासों को नष्ट होने से बचाने हेतु वनों के कटान पर पूर्ण रोक लगाई जानी जरूरी है। उत्तराखंड के वनों को आग से बचाना पहाड़ी क्षेत्र के स्थानीय निवासियों की भी वनविभाग के साथ पहली जिम्मेदारी है, इन्हें भी अग्निशमन यंत्रों किट आदि वन कर्मियों की भांति दिए जाने चाहिए।

संवाद में लेफ्टिनेंट कर्नल बीएम थापा, अर्जुन कोहली, कल्याण सिंह रावत, डा. स्वामी एस चंद्रा, सोनल पनेरु, गजेंद्र सिंह रमोला, सुशील त्यागी, मोहन सिंह खत्री, अवधेश शर्मा, ताराचंद गुप्ता, मोहन सिंह नेगी, राजेश भाटिया, जी एल पाहवा, जीपी मल्होत्रा, फकीर चंद खेत्रपाल, जीवन झा, नीरज उनियाल, सुदर्शन नेगी, गजपाल सिंह, रावत खेमराज सिंह, नरेश चंद्रकुला, डॉ राकेश डंगवाल, रवि सिंह नेगी, दीपांशु पालीवाल, रेहान सिद्धिकी, हिमांशु बिष्ट, लक्ष्मण सिंह बिष्ट, विनोद रमोला, देबू थापा, नितिन गोयल शामिल थे।

कार्यक्रम का समापन खाराखेत नून नदी से भरकर लाए जल कलश को गांधी पार्क स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा पर लाकर अर्पित किया गया। यहां नमक तोड़ो आंदोलन में भाग लेने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के त्याग और समर्पण की सराहना करते हुए उनके मार्ग पर चलने का संकल्प लिया गया।

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