भ्रष्टाचार व लापरवाही की उच्च स्तरीय जांच एवं दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग को लेकर संयुक्त नागरिक संगठन ने लिखा पत्र
पत्र में कहा है कि ये घटना सुशासन नहीं, बल्कि सुनियोजित भ्रष्टाचार और आपराधिक लापरवाही का प्रमाण है। पत्र में लिखा है कि जनता के 16 करोड़ रुपये ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत की भेंट चढ़ गए। ये पैसा नदी में नहीं, भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा है जिसकी तत्काल जांच करानी चाहिए।

देहरादून। राजधानी देहरादून के प्रेमनगर मार्ग, नंदा की चौकी के पास टोंस नदी पर विगत 6 माह पहले टूटे पुल के 16 दिन पहले 16 करोड़ की लागत से पुनर्निर्मित पुल (दिनांक 27 जुलाई 2026 की रात में) के दोबारा ध्वस्त होने से प्रमाणित विभागीय भ्रष्टाचार व लापरवाही की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषियों पर कठोर कार्रवाई एवं रिकवरी हेतु जनहित में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज से त्याग पत्र लिए जाने हेतु अनुरोध करते हुए संयुक्त नागरिक संगठन ने नीतिन गडकरी, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, मुख्य सचिव को पत्र लिखा है।
पत्र में कहा है कि ये घटना सुशासन नहीं, बल्कि सुनियोजित भ्रष्टाचार और आपराधिक लापरवाही का प्रमाण है। पत्र में लिखा है कि जनता के 16 करोड़ रुपये ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत की भेंट चढ़ गए। ये पैसा नदी में नहीं, भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा है जिसकी तत्काल जांच करानी चाहिए। पीडब्लूडी,गुणवत्ता नियंत्रण इकाई और थर्ड पार्टी जांच सिर्फ कागजों तक सीमित होती रही है। अब दोषियों की बर्खास्तगी भी की जानी जरूरी है।
संगठन सचिव सुशील त्यागी ने मांग की है किय इस घटना की तत्काल उच्च स्तरीय न्यायिक व सतर्कता जांच गठित की जाए और दोषी ठेकेदार, इंजीनियर एवं अधिकारियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर 16 करोड़ की रिकवरी की जाए। प्रेमनगर पुल के निर्माण की पूरी फाइल – एस्टीमेट, टेंडर, गुणवत्ता रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। सम्पूर्ण उत्तराखंड में पिछले 3 वर्षों में बने सभी पुलों व सड़कों का थर्ड पार्टी ऑडिट कराया जाए। इस विभाग में जन शिकायत निवारण हेल्पलाइन बनाई जाए ताकि नागरिक बिना भय के भ्रष्टाचार उजागर कर सकेंगे।दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खंडूरी के सुशासन, भ्रष्टाचार उन्मूलन, जनसेवा के संकल्प को तभी साकार किया जा सकेगा।



