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सिडकुल कार्यालय पहुंचीं उत्तराखंड की बेटी भावना पांडे, हालात देख जताया रोष

भावना पांडे ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी उत्तराखंड के विकास को लेकर बातें तो बहुत बड़ी-बड़ी करते हैं किंतु धरातल पर हकीकत कुछ और ही नज़र आती है। आज कईं उद्योग उत्तराखंड आने को कतार में हैं किंतु सरकार के पास उन्हें देने को ज़मीन नहीं है।

हरिद्वार। उत्तराखंड की बेटी, राज्य आंदोलनकारी एवं प्रसिद्ध समाजसेवी भावना पांडे हमेशा ही प्रदेश हित के लिए कार्य करती एवं आवाज़ उठाती रहती हैं। अपने इसी प्रयास के चलते वे हरिद्वार के सिडकुल कार्यालय पहुंचीं किंतु वहाँ की व्यवस्थाओं और अधिकारियों की लापरवाही को देख उन्हें काफी निराशा हुई। इस पर उन्होंने रोष जताया। सिडकुल के ऐसे हालात और अधिकारियों की मनमानी के लिए उन्होंने धामी सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

उत्तराखंड की बेटी भावना पांडे ने कहा कि वे उत्तराखंड के हित के लिए कईं योजनाओं पर कार्य कर रही हैं, उनके कुछ पूर्व के कार्य भी लंबित पड़े हैं जिनके विषय में जानकारी जुटाने वे हरिद्वार के सिडकुल कार्यालय पहुंचीं थीं। उनके अनुसार वे राज्य में कुछ उद्योगों को स्थापित कराने में सहयोग प्रदान करने का प्रयास कर रही हैं किंतु सिडकुल के अधिकारियों की मनमानी और सरकार की लापरवाही की वजह से ये कार्य अटके हुए हैं।

भावना पांडे ने कहा कि उत्तराखंड में बीते दो वर्षों से लगभग 80 उद्योगों की स्थापना का कार्य अधर में लटका हुआ है। इन उद्योगों की स्थापना के लिए राज्य सरकार के पास जमीनें नहीं हैं। इस विषय में वे सिडकुल के प्रबंधन निदेशक से वार्ता करने गई थीं किंतु उन्होंने व्यस्त होने की बात कहकर मुलाकात से मना कर दिया।

भावना पांडे ने कहा कि उत्तराखंड में अधिकांश अधिकारी काम करना नहीं चाहते और अपनी मनमानी करते हैं। उन्होंने कहा कि धामी सरकार द्वारा सिडकुल के पूर्व अधिकारी रोहित मीणा को यहाँ से हटा दिया गया, जबकि वे एक कर्मठ, बुद्धिमान व ईमानदार अधिकारी हैं। उनके यहाँ से हट जाने के बाद से ही सिडकुल में कईं बड़ी योजनाएं व जरूरी कार्य ठप्प पड़े हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री धामी से मांग करते हुए कहा कि सिडकुल के पूर्व अधिकारी रोहित मीणा को पुनः यहाँ के सीएमडी पद की जिम्मेदारी दी जाए।

भावना पांडे ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी उत्तराखंड के विकास को लेकर बातें तो बहुत बड़ी-बड़ी करते हैं किंतु धरातल पर हकीकत कुछ और ही नज़र आती है। आज कईं उद्योग उत्तराखंड आने को कतार में हैं किंतु सरकार के पास उन्हें देने को ज़मीन नहीं है। दरअसल सक्षम अधिकारियों का चयन कर उन्हें सही जिम्मेदारी ना देना ही सरकार की बड़ी नाकामी है। मुख्यमंत्री को सही अधिकारियों की परख कर उन्हें जिम्मेदारी देनी चाहिए।

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