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नेपाल में जलप्रलय की क्या है वजह? जानिए रिसर्च में क्या क्या पता चला

नेपाल में बुधवार को अचानक आई प्राकृतिक आपदा में अबतक करीब 500 लोगों के मारे जाने की खबर है और हजारों लोग लापता हैं। ये आपदा कैसे आई, इसकी क्या वजह थी, रिसर्च रिपोर्ट में क्या पता चला है? जानें

काठमांडू। नेपाल के भोटे कोशी में बुधवार को आई प्राकृतिक आपदा आने के पीछे की वजह क्या है, भूकंप आया था या हिमचट्टान गिरा था। वैज्ञानिक इस बात की जांच कर रहे हैं कि नेपाल की भोटे कोशी नदी में आई विनाशकारी अचानक बाढ़ के पीछे क्या ग्लेशियर का टूटना और बर्फ-चट्टान का हिमस्खलन हो सकता है। शुरुआती अनुमानों से पता चलता है कि मलबे ने शायद कुछ समय के लिए लेंडे नदी का बहाव रोक दिया था और एक लैंडस्लाइड बांध बना दिया था, जो बाद में टूट गया।

बुधवार को रसुवा जिले में भोटे कोशी नदी में आई इस विनाशकारी बाढ़ ने सैकड़ों लोगों की जान ले ली और हजारों लोग अब भी लापता हैं। इस बाढ़ ने नदी के किनारे बने पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे को नष्ट कर दिया। यह बाढ़ नदी के बहाव के साथ नीचे की ओर तेजी से बढ़ी और इसने कई जिलों में तबाही मचाई।

 

क्या ग्लेशियर टूटकर नदी में बहा?

रसुवागढ़ी में नेपाल-तिब्बत सीमा क्रॉसिंग के पास अचानक आए पानी के बहाव के बाद शुरुआती अनुमानों में ग्लेशियर झील के फटने से आई बाढ़ (GLOF) और हिमस्खलन की आशंका जताई गई थी।
हालांकि, ‘द काठमांडू पोस्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार, सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण करने वाले वैज्ञानिकों का अब मानना ​​है कि बर्फ और चट्टान का एक बड़ा हिस्सा लेंडे नदी में गिर गया होगा, जिससे कुछ समय के लिए नदी का बहाव रुक गया और एक लैंडस्लाइड बांध बन गया, जो बाद में टूट गया।

रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण ने भी बर्फ और चट्टान के हिमस्खलन को ही मुख्य कारण माना है। वैज्ञानिकों द्वारा विश्लेषण की गई सैटेलाइट तस्वीरों में रसुवागढ़ी सीमा क्रॉसिंग से लगभग 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में एक बड़ा हिमस्खलन होता हुआ दिखाई दिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसा लगता है कि मलबा भोटे कोशी की सहायक नदी लेंडे में गिर गया, जिससे मलबे से भरी एक शक्तिशाली बाढ़ आ गई।

कब आया भूकंप, कितनी थी तीव्रता?

‘द काठमांडू पोस्ट’ ने काठमांडू विश्वविद्यालय के जलवायु शोधकर्ता और प्रोफेसर रिजन भक्त कायस्थ के हवाले से कहा कि बाढ़ आने से पहले हिमस्खलन के कारण लेंडे नदी का बहाव रुक गया था।
कायस्थ ने कहा, “हमें संदेह है कि नेपाल की तरफ हुए हिमस्खलन ने लेंडे नदी का बहाव रोक दिया था। लगभग उसी समय भूकंप भी आया था, लेकिन हमें अभी यह नहीं पता है कि क्या उस भूकंप ने हिमस्खलन को शुरू करने में कोई भूमिका निभाई थी।”

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भूकंप की तीव्रता को लेकर क्यों है कंफ्यूजन? 

यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने शुरू में बुधवार सुबह 8:37 बजे तिब्बत में गोसाईंकुंडा से लगभग 47 किलोमीटर उत्तर में 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया था। बाद में उसने अपने आकलन में बदलाव करते हुए कहा कि लंबी अवधि की भूकंपीय तरंगों के विश्लेषण से पता चला है कि भूकंपीय ऊर्जा ग्लेशियर के टूटने और मलबे के बहाव से उत्पन्न हुई थी, न कि भूकंप से। बाद में इस घटना को 5.2 तीव्रता का भूकंपीय घटनाक्रम माना गया। खबरों के मुताबिक, मलबे ने ल्हेंडे नदी का रास्ता रोक दिया, जिससे एक अस्थायी झील बन गई; बाद में रुकावट हटने पर कीचड़ और बड़े पत्थरों का सैलाब भूटे कोशी नदी की ओर बह निकला।

जियो-इन्फॉर्मेशन एसोसिएट ने क्या बताया?
इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) में रिमोट सेंसिंग और जियो-इन्फॉर्मेशन एसोसिएट सार्थक श्रेष्ठ ने कहा कि अब तक मिले सबूतों से पता चलता है कि नेपाल की तरफ आया एवलांच (बर्फ का खिसकना) ही मुख्य वजह थी। श्रेष्ठ ने कहा, “अब तक के सबूत बताते हैं कि स्याफ्रुबेसी के ऊपर आए एवलांच ने नदी का रास्ता रोक दिया और उसके बाद बाढ़ आ गई।” उन्होंने कहा कि पूरी स्थिति समझने में अभी एक-दो हफ़्ते और लग सकते हैं।

ICIMOD चीनी संस्थानों के साथ मिलकर यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि असल में क्या हुआ था। संस्थान ने कहा कि प्रभावित इलाके से मिली वीडियो फुटेज और रिपोर्ट के आधार पर शुरुआती अनुमान से पता चलता है कि ल्हेंडे नदी में बर्फ और चट्टानों का मलबा बड़ी मात्रा में गिरा होगा। इसके कारण आई बाढ़ बहुत तेज़ और शक्तिशाली थी। ICIMOD के अनुसार, गल्छी में त्रिशूली नदी का जलस्तर सिर्फ़ 30 मिनट में नौ मीटर तक बढ़ गया, जबकि उसी दौरान मलेखु में जलस्तर लगभग सात मीटर बढ़ गया।

 

ग्लेशियल झील फटने की संभावना

शुरुआत में एक और संभावना ग्लेशियल झील के फटने (ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट) की जताई गई थी। इसी इलाके में पिछले साल 8 जुलाई को भोटे कोशी नदी में अचानक पानी का बहाव बढ़ गया था, जिसे नेपाल के जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग ने नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ल्हेंडे नदी में ग्लेशियल झील फटने का नतीजा बताया था। ICIMOD और UN डेवलपमेंट प्रोग्राम की एक स्टडी में नेपाल, भारत और तिब्बत में 3,624 ग्लेशियल झीलों की पहचान की गई है, जिनमें से 47 को संभावित रूप से खतरनाक माना गया है; इनमें से 21 झीलें नेपाल में हैं।
वैज्ञानिकों ने क्या दी है चेतावनी 

वैज्ञानिकों ने यह भी चेतावनी दी है कि दोबारा बाढ़ आने का खतरा अभी टला नहीं है। बादल छाए रहने के कारण सैटेलाइट से निगरानी में दिक्कत आ रही है, जबकि विशेषज्ञ नदी के ऊपरी हिस्से में एक और अस्थायी जलाशय बनने की संभावना पर नज़र रखे हुए हैं।

कायास्था ने कहा, “खतरा अभी भी बना हुआ है। तापमान बढ़ने से ग्लेशियर पिघलने, बर्फ और चट्टानों के टूटने और हिमालय में एवलांच आने की संभावना बढ़ जाती है। लेकिन हम पक्के तौर पर नहीं कह सकते कि अगली घटना कहां होगी।”

चीनी अधिकारियों ने क्या कहा?

इस बीच, चीनी अधिकारियों ने आपदा प्रभावित इलाके के निचले हिस्से में एक और संभावित खतरनाक घटना की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि नेपाल में छोचेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम के पास एक बड़ी रुकावट वाली झील (बैरियर लेक) बन गई है। चाइना सेंट्रल टेलीविज़न की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार सुबह तक वहां लगभग 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा हो गया था और पानी बाहर बहना शुरू हो गया था। अगले तीन दिनों में झील में और 30 लाख क्यूबिक मीटर पानी आ सकता है, जिससे यह चिंता बढ़ गई है कि प्राकृतिक बांध टूट सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, चीनी अधिकारी झील पर नज़र रख रहे हैं और बांध टूटने से होने वाले संभावित असर का पता लगाने के लिए बाढ़ सिमुलेशन कर रहे हैं। छोचेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियां तिब्बत से निकलती हैं और नेपाल में प्रवेश करने से पहले आपस में मिल जाती हैं; नेपाल में इस नदी को भोटे कोशी के नाम से जाना जाता है। यह त्रिशूली नदी की मुख्य ऊपरी सहायक नदी है।

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