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बसंत पंचमी के पावन अवसर पर गंगा स्नान करने घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

बसंत पंचमी पर हरिद्वार गंगा स्नान करने के लिए सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी है। देव डोलियां भी स्नान के लिए पहुंची हैं।

हरिद्वार। शुक्रवार को बसंत पंचमी का गंगा स्नान पर्व है। तड़के से ही लोग स्नान के लिए हरकी पैड़ी समेत अन्य घाटों पर पहुंचने लगे। आस्था के साथ पहुंचे लोगों ने स्नान दान किया। देव डोलियां लेकर भी कई जगह से श्रद्धालु पहुंचे और देव डोलियों को गंगा स्नान कराया गया।

हिंदू धर्म में कर्णछेदन को महत्वपूर्ण संस्कारों में माना गया है। ज्योतिषीय तिथियों के अनुसार बसंत पंचमी का दिन कर्णछेदन के लिए शुभ माना जाता है। इस दिन सूर्य उत्तरायण रहते हैं जिसे देवताओं का काल कहा जाता है। उत्तरायण में किए गए संस्कार शुभ और दीर्घकालीन फल देने वाले माने जाते हैं। इसलिए बसंत पंचमी पर कर्णछेदन का प्रचलन बढ़ रहा है।

बसंत पंचमी का दिन माता सरस्वती का है। ज्योतिषों का कहना है कि इस दिन विद्या आरंभ के साथ कर्णछेदन कराने से बालक की बुद्धि, विद्या और वाणी पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। मान्यता है कि कर्णछेदन से कानों की विशेष नाड़ियां जागृत होती हैं जिससे मस्तिष्क की ग्रहण क्षमता बढ़ती है। ज्योतिष बताते हैं कि वसंत पंचमी स्वयं सिद्ध मुहूर्त है।

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इस दिन किसी अलग शुभ मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती। इसी कारण बड़ी संख्या में अभिभावक इसी तिथि को अपने बच्चों का कर्णछेदन संस्कार कराते हैं। परंपरागत रूप से यह संस्कार उत्सव की तरह मनाया जाता था। पहले घरों में हवन-पूजन के बाद कर्णछेदन किया जाता था और रिश्तेदारों के साथ गांव या मोहल्ले में मिष्ठान वितरण किया जाता था।

समय के साथ इसका स्वरूप भले ही सीमित हुआ हो लेकिन आस्था और परंपरा आज भी कायम है। ज्योतिषों का कहना है कि कर्णछेदन सूर्य की किरणों को भीतर प्रवेश कराकर तेजस्विता बढ़ाता है। इससे राहु-केतु जैसे ग्रहों के बुरे प्रभाव कम होते हैं। सोने या चांदी के कुंडल पहनने से शरीर तेजस्वी बनता है। शास्त्रों के अनुसार जिस पुरुष का यह संस्कार नहीं होता, उसे श्राद्ध का अधिकारी नहीं माना जाता है।

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