‘गुरू पूर्णिमा’ के अवसर पर जीआरडी एकेडमी प्रेमनगर में आयोजित हुआ कार्यक्रम
प्रधानाचार्य डॉ. अभिनव कपूर ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को ज्ञान, संस्कार और आत्मबोध का सर्वोच्च स्रोत माना गया है। महर्षि वेदव्यास जी ने वेदों के संकलन एवं महाभारत की रचना के माध्यम से मानवता को अमूल्य आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर प्रदान की।

देहरादून। जीआरडी एकेडमी केहरी गांव, प्रेमनगर में बुधवार को महर्षि वेदव्यास जी की जयंती एवं ‘गुरू पूर्णिमा’ के पावन अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के छात्र एवं छात्राओं ने कविता पाठ एवं विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से ‘गुरु पूर्णिमा’ के महत्व पर प्रकाश डाला।

‘गुरू पूर्णिमा’ के पावन अवसर पर जीआरडी एकेडमी प्रेमनगर में आयोजित कार्यक्रम में स्कूल के विद्यार्थियों ने विद्यालय के शिक्षकों के निर्देशन में मंच पर विभिन्न प्रकार की प्रस्तुतियां दी। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा जीवन में गुरु की महत्ता को दर्शाते हुए सुंदर वर्णन किया गया और गुरुजनों को नमन किया गया।

इस अवसर पर अपने संबोधन में जीआरडी एकेडमी के प्रधानाचार्य डॉ. अभिनव कपूर ने महर्षि वेदव्यास जी की जयंती तथा भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा के पावन पर्व ‘गुरु पूर्णिमा’ (आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा) की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। डॉ. अभिनव कपूर ने कहा, गुरु अपने ज्ञान से शिष्यों के उज्ज्वल भविष्य का सृजन करने के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अपने निस्वार्थ भाव से राष्ट्र को उन्नति के पथ पर अग्रसर रखने वाले सभी गुरुजनों को प्रणाम।

प्रधानाचार्य डॉ. अभिनव कपूर ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को ज्ञान, संस्कार और आत्मबोध का सर्वोच्च स्रोत माना गया है। महर्षि वेदव्यास जी ने वेदों के संकलन एवं महाभारत की रचना के माध्यम से मानवता को अमूल्य आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर प्रदान की। आइए, इस पावन अवसर पर अपने गुरुजनों के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करें तथा उनके आदर्शों और शिक्षाओं का अनुसरण करते हुए सेवा और सदाचार के मार्ग पर अग्रसर रहने का संकल्प लें।
इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. अभिनव कपूर के अलावा सिमरन, नीलम, अनिशा, शिवानी व मनीष आदि शिक्षकगण एवं कर्मचारी मौजूद रहे।




